नई दिल्ली: सूखे के लिए मुआवजे, न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने और अपनी अन्य मांगों को लेकर किसान आज मुंबई में विधानसभा के पास प्रदर्शन करेंगे. हजारों किसानों और आदिवासियों ने बुधवार को ठाणे से मुंबई तक दो दिनों का मार्च शुरू किया है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 20,000 से ज्यादा किसान इस मार्च में शामिल हो रहे हैं. आठ महीने पहले किसानों ने नासिक से ऐसा ही मार्च निकाला था. मुंबई मार्च करने वाले ये किसान स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने के साथ ही एमएसपी पर कानून लाने जैसी कई मांगे कर रहे हैं. किसान नेताओं का दावा है कि महाराष्ट्र सरकार ने 6 महीने बीत जाने के बाद भी अब तक कोई वादा पूरा नहीं किया.

मराठा रिजर्वेशन पर सिफारिशें विधानसभा के सामने रखने की प्रक्रिया में है महाराष्‍ट्र सरकार

किसानों ने बुधवार दोपहर से पैदल यात्रा शुरू की है. मार्च में शामिल एक नेता ने बताया कि गुरुवार सुबह वे दक्षिण मुंबई में आजाद मैदान पहुंचेंगे और फिर वे विधानभवन के पास प्रदर्शन करेंगे. अभी राज्य विधानसभा का सत्र चल रहा है. मार्च में हिस्सा लेने वालों में अधिकतर लोग ठाणे, भुसावल और मराठवाड़ा क्षेत्रों से हैं. स्वराज अभियान के मुखिया और आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता योगेंद्र यादव और संरक्षणवादी डॉ राजेंद्र सिंह इस किसान मार्च का नेतृत्व कर रहे हैं.

मराठा आरक्षण : आयोग ने सौंपी रिपोर्ट, सीएम फड़नवीस ने किया आरक्षण लागू करने का इशारा

दरअसल, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और पंजाब में बीते 6 महीने से लगातार अपनी मांगों को लेकर और सरकार के खिलाफ किसान प्रदर्शन कर रहे हैं. प्रदर्शन का आयोजन कर रहे लोक संघर्ष मोर्चे की महासचिव प्रतिभा शिंदे ने कहा, ‘हमने राज्य सरकार से लगातार कहा है कि वे लंबे समय से चली आ रही हमारी मांगों को पूरा करे लेकिन प्रतिक्रिया उदासीन रही है.’ शिंदे ने कहा, ‘हम लोग इस बात का अधिक से अधिक ख्याल रख रहे हैं कि मुंबई के लोगों को कोई परेशानी नहीं हो.’

नोटबंदी भारत के इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला, गरीब जनता के पैसे अमीरों की जेब में डाले गए: राहुल गांधी

किसानों की मांग है कि खेतिहर मजदूरों की जंगल की जमीनें दी जाएं. साथ ही, सूखा प्रभावित इलाकों में सही ढंग से राहत पहुंचे. किसानों का कहना है कि पिछले प्रदर्शन को कई महीनें हो गए, मगर अब तक एक भी आश्वासन पर काम नहीं हुआ. राज्य में भाजपा नीत सरकार द्वारा पिछले साल घोषित कर्ज माफी पैकेज को उचित तरीके से लागू करने, किसानों के लिए भूमि अधिकार और खेतिहर मजदूरों के लिए मुआवजे की मांग कर रहे हैं.