नई दिल्ली: केंद्र सरकार द्वारा लाए गए कृषि कानूनों के खिलाफ लगातार किसानों का प्रदर्शन जारी है. ऐसे में केंद्र और किसानों के बीच आज 7वें दौर की वार्ता हो सकती है. बता दें कि इससे पहले 30 दिसंबर को किसान नेताओं संग केंद्र सरकार की बातचीत हुई थी. इसी कड़ी में सरकार द्वारा किसानों के कुछ मांगों को मान भी लिया गया था, जिनमें पराली जलाने को जुर्म की श्रेणी से बाहर लाया गया और दूसरी बिजली संसोधन विधेयक 2020.Also Read - महाराष्ट्र: केंद्र ने शिवसेना के बागी 15 विधायकों को Y प्लस कैटेगरी का सुरक्षा कवर दिया

बता दें कि किसानों का प्रदर्शन काफी लंबे समय से चल रहा है और समय के साथ यह उर भी तेज होता जा रहा है. किसानों की दो मुख्य मांगे हैं- पहली की तीनों नए कृषि कानूनों को खत्म करना और दूसरी न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानूनी रूप देना. हालांकि अब तक इन दोनों मामलों में किसी तरह के बदलाव से सरकार द्वारा पिछली बैठक के बाद मना कर दिया गया था. हालांकि ऐसे कयास लगाए जा सकते हैं कि केंद्र और किसानों के बीच के गतिरोध को कम करने या खत्म करने में यह बैठक काफी अहम हो सकती है. Also Read - 'अडाणी ग्रुप जैसे लोग इतने मालदार कैसे हो रहे', सत्यपाल मलिक ने कसा मोदी सरकार पर तंज

सोमवार के दिन होने जा रही वार्ता इसी बात पर टिकी है कि सरकार तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करे. बता दें कि किसान संगठनों द्वारा चेतावनी दी गई है कि अगर उनकी मांगे पूरी न की गई तो हजारों की संख्या में किसान प्रदर्शनकारी 26 जनवरी के दिन होने वाले परेड के लिए राजधानी पहुंचेंगे. बता दें कि केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, पीयूष गोयल और सोम प्रकाश केंद्र सरकार का नेतृत्व करेंगे. इस दौरान 40 किसान यूनियन के नेता वार्ता में शामिल होंगे. Also Read - देश के सभी राज्यों में होना चाहिए किसान आंदोलन, दिल्ली तक सीमित न रहे: योगेंद्र यादव