Farmers Protest Against Farm Bills 2020: केंद्र के तीन कृषि बिलों के खिलाफ देश के कई राज्यों में चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच मेघायल के राज्यपाल सत्यपाल मलिक (Meghalaya Governor Satya Pal Malik) ने हरियाणा के एक निर्दलीय विधायक सोमबीर सांगवान (MLA of Haryana Sombir Sangwan) को पत्र लिखा है. शुक्रवार (23 अप्रैल, 2021) को लिखे इस पत्र में राज्यपाल ने कहा, ‘मैंने माननीय प्रधानमत्री (PM Narendra Modi) और गृहमंत्री अमित शाह जी (HM Amit Shah) को बताने की कोशिश की है कि वो गलत रास्ते पर हैं. वो किसानों को दबाने, डराने और उन पर दबाव डालने की कोशिश ना करें.’Also Read - Chachaji Ka Video: चाचाजी की मोदी सरकार से अपील- पेट्रोल 2000 रुपये लीटर कर दो प्लीज, तभी पता चलेगा कितने अमीर हैं हम | देखिए

किसान आंदोलन के समर्थन में पिछले दिनों हरियाणा की भाजपा-जेजेपी सरकार से समर्थन वापस वाले वाले सांगवान ने इस संबंध में राज्यपाल मलिक को पत्र लिखा था. मलिक ने इसका जवाब दिया है. उन्होंने कहा कि इस संबंध में मैंने पीएम और एचएम को बताया है कि किसानों को दिल्ली से खाली हाथ नहीं लौटना चाहिए. Also Read - Power Crisis: रिकॉर्ड तोड़ गर्मी में बेतहाशा बिजली कटौती जारी! कोयले की कमी को लेकर सियासी घमासान | 10 बड़ी बातें

उन्होंने कहा- ‘किसान आंदोलन के संबंध में मैंने माननीय प्रधानमंत्री और माननीय गृहमंत्री से मुलाकात की और किसानों संग न्याय करने की सलाह दी. सरकार उनकी वास्तविक मांगों को स्वीकार करे. मुकालात में मैंने ये भी स्पष्ट किया कि किसान आंदोलन को दबाया नहीं जा सकता. केंद्र को इस मुद्दे को हल करते हुए उनकी मांग मान लेनी चाहिए. मैं भविष्य में भी ऐसे प्रयास जारी रखूंगा. इसके लिए जो भी संभव होगा मैं करूंगा.’ Also Read - Defense Import: मोदी सरकार ने लिया बड़ा फैसला, रक्षा आयात में होगी कटौती, घरेलू रक्षा उद्योग को मिलेगा बढ़ावा | Watch Video

राज्यपाल ने विधायक को पत्र में आगे लिखा- मैं आपको और आपकी खाप को भरोसा दिलाना चाहता हूं कि मैं सहयोग कभी नहीं छोड़ूंगा. मई के पहले सप्ताह में मैं दिल्ली पहुंच रहा हूं और संबंधित सभी नेताओं से मिलकर किसानों के पक्ष में आम सहमति बनाने की कोशिश करेंगे.’

हिंदी में लिखे पत्र में राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने आगे कहा कि मुझे आपका पत्र मिला है. इसमें आपने संसद और किसान आंदोलन द्वारा पारित कानूनों के बारे में विस्तार से बताया है. देश के किसानों ने शांतिपूर्ण ढंग से अद्भुत जंग लड़ी है और इस संघर्ष में 300 साथियों को खो दिया. चिंता की बात है कि इतनी बड़ी त्रासदी के बाद भी केंद्र सरकार ने एक बार भी दुख नहीं जताया.