नई दिल्ली: देश में किसान आंदोलन के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट द्वारा एक कमेटी बनाई गई जिसका काम केंद्र सरकार और किसानों के बीच जारी गतिरोध का समाधान निकालना है. बावजूद इसके किसान आंदोलन खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. किसानों का कहना है कि जबतक तीनों कृषि कानूनों को रद्द नहीं किया जाएगा तबतक इस आंदोलन को किसान खत्म नहीं करेंगे. इसी कड़ी में विदेशी फंडिंग के मामले को लेकर NIA व अन्य एजेंसियां भी मामले की जांच में जुट चुकी हैं. विरोध प्रदर्शन को हवा देने के मामले में NIA, ED, आयकर विभाग सहित अन्य एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं. वहीं देश के बाहर से की जा रही फंडिंगो के कई स्तरों की जांच की जा रही है. वहीं पूचताछ में लोगों को शामिल होने के लिए नोटिस भेजा जा रहा है. अगर कोई पूछताछ में शामिल नहीं होता तो उसे दोबारा समन भेजा जाएगा. Also Read - Kisan Andolan: किसान आंदोलन से NHAI के सामने बड़ी चुनौतियां, कई प्रोजेक्ट के काम लटके

खबरों की मानें त 12 दिसंबर को गृह मंत्रलाय में ED, NIA, CBI और आयकर विभाग की बैठक हुई थी. इस बैठक के बाद बब्बर खालसा इंटरनेशनल, सिख फॉर जस्टिस, खालिस्तान जिन्दाबाद फोर्स और खालिस्तान टाइगर फोर्स द्वारा की जा रही फंडिंगों पर नजर रखने की योजना बनी. इसी कड़ी में 15 दिसंबर के दिन गृह मंत्रालय की शिकायद के आधार पर एक एक FIR दर्ज की गई थी. Also Read - NIA ने Lashkar-e-Mustafa के चीफ हिदायत-उल्ला मलिक की गिरफ्तारी से जुड़े केस की जांच अपने हाथ में ली

इंटेलिजेंस एजेंसियों के मुताबिक किसान आंदोलन की कई संगठन जैसे बब्बर खालसा इंटरनेशनल, सिख फॉर जस्टिस, खालिस्तान जिन्दाबाद फोर्स और खालिस्तान टाइगर फोर्स जैसे अलगाववादी संगठन पैसे की फंडिंग कर रहे हैं. गृह मंत्रालय की शिकायत के बाद दर्ज FIR में लिखा गया है कि विरोध प्रदर्शन को प्रोत्साहित करने में उक्त अलगाववादी संगठन शामिल हैं. वे भारत में डर, अराजकता, असंतोष की स्थिति पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं. वे भारत सरकार के खिलाफ विद्रोह के लिए भड़का रहे हैं. Also Read - Kisan Andolan: आंदोलन तेज करेंगे किसान- SKM का ऐलान, चुनावी राज्यों में BJP का करेंगे विरोध और 12 मार्च को...