Farmers Protest And Farm Law:सुप्रीम कोर्ट में आज यानी सोमवार को कृषि कानूनों की वैधता पर अहम सुनवाई होनेवाली है. कृषि कानूनों की वैधता को एक किसान संगठन और वकील एमएल शर्मा ने चुनौती दी है. शर्मा ने याचिका में कहा है कि केंद्र सरकार को कृषि से संबंधित विषयों पर कानून बनाने का अधिकार नहीं है. याचिका में ये भी कहा गया है कि कृषि और भूमि राज्यों का विषय है और संविधान की सातवीं अनुसूची की सूची 2 (राज्य सूची) में इसे एंट्री 14 से 18 में दर्शाया गया है. ऐसे में यह स्पष्ट रूप से राज्य का विषय है, इसलिए इस कानून को निरस्त किया जाए.Also Read - Covid Vaccination: टीकाकरण को लेकर Supreme Court में सरकार का जवाब, मर्जी के बिना टीका नहीं लग सकता

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली तीन जजों के समक्ष सोमवार को होनेवाली सुनवाई इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकार ने कहा है कि यदि सर्वोच्च अदालत किसानों के हक में फैसला देता है तो उन्हें आंदोलन करने की जरूरत नहीं रहेगी. कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा था केंद्र सरकार ने कानून समवर्ती सूची की एंट्री 33 के आधार पर बनाए हैं, उन्हें लगता है इस एंट्री से कृषि विपणन पर कानून बनाने का अधिकार है. Also Read - UP Assembly Election 2022: समाजवादी पार्टी की मान्यता रद्द करने की मांग, नाहिद हसन की उम्मीदवारी पर घिरी सपा

बता दें कि पिछली सुनवाई पर कोर्ट ने कहा था कि वह किसान आंदोलन को समाप्त करने और कृषि कानूनों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करेगा. हालांकि, सरकार ने इसका विरोध किया था और कहा था कि यदि कानूनों की वैधता पर सुनवाई शुरू की गई, तो किसानों से बातचीत रोकनी पड़ेगी. सरकार ने कहा था कि किसानों से बातचीत का अगला दौर शनिवार को होगा. लेकिन ये बातचीत सातवें दौर मे भी विफल हो गई. Also Read - OBC Reservation: निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, गरमाई मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र की राजनीति

वहीं, किसान आंदोलनकारियों को दिल्ली की सीमाओं से हटाने के लिए वकील ऋषभ शर्मा समेत चार ने याचिकाएं दायर की हैं. उन्होंने कहा कि उनके सीमाओं पर जमावड़े से कोविड-19 भी फैल सकता है.