Farmers Protest And Farm Law:सुप्रीम कोर्ट में आज यानी सोमवार को कृषि कानूनों की वैधता पर अहम सुनवाई होनेवाली है. कृषि कानूनों की वैधता को एक किसान संगठन और वकील एमएल शर्मा ने चुनौती दी है. शर्मा ने याचिका में कहा है कि केंद्र सरकार को कृषि से संबंधित विषयों पर कानून बनाने का अधिकार नहीं है. याचिका में ये भी कहा गया है कि कृषि और भूमि राज्यों का विषय है और संविधान की सातवीं अनुसूची की सूची 2 (राज्य सूची) में इसे एंट्री 14 से 18 में दर्शाया गया है. ऐसे में यह स्पष्ट रूप से राज्य का विषय है, इसलिए इस कानून को निरस्त किया जाए. Also Read - सरकार और किसानों की आज होने वाली बैठक टली, अब 20 जनवरी को होगी अगली मीटिंग

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली तीन जजों के समक्ष सोमवार को होनेवाली सुनवाई इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकार ने कहा है कि यदि सर्वोच्च अदालत किसानों के हक में फैसला देता है तो उन्हें आंदोलन करने की जरूरत नहीं रहेगी. कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा था केंद्र सरकार ने कानून समवर्ती सूची की एंट्री 33 के आधार पर बनाए हैं, उन्हें लगता है इस एंट्री से कृषि विपणन पर कानून बनाने का अधिकार है. Also Read - Kisan Andolan: कृषि कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति की पहली बैठक कल

बता दें कि पिछली सुनवाई पर कोर्ट ने कहा था कि वह किसान आंदोलन को समाप्त करने और कृषि कानूनों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करेगा. हालांकि, सरकार ने इसका विरोध किया था और कहा था कि यदि कानूनों की वैधता पर सुनवाई शुरू की गई, तो किसानों से बातचीत रोकनी पड़ेगी. सरकार ने कहा था कि किसानों से बातचीत का अगला दौर शनिवार को होगा. लेकिन ये बातचीत सातवें दौर मे भी विफल हो गई. Also Read - भगोड़े शराब कारोबारी Vijay Mallya को कब लाया जाएगा भारत, क्यों हो रही देर? सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने दी यह जानकारी

वहीं, किसान आंदोलनकारियों को दिल्ली की सीमाओं से हटाने के लिए वकील ऋषभ शर्मा समेत चार ने याचिकाएं दायर की हैं. उन्होंने कहा कि उनके सीमाओं पर जमावड़े से कोविड-19 भी फैल सकता है.