Farmers Protest: केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह (Union Minister Narendra Singh Tomar) तोमर ने कहा कि अगर किसान संगठनों को सरकार से बातचीत का प्रस्ताव स्वीकार नहीं है तो वो अपना प्रस्ताव लेकर आएं. उन्होंने आज शुक्रवार को न्यूज एजेंसी एएनआई से ये बात कही. उन्होंने कहा कि सरकार किसानों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है. जहां तक किसान यूनियन (Farmers Union) का सवाल है. उनकी आपत्ति है. पूरे देश के बहुसंख्यक किसान इस सुधार के साथ खड़े हैं. इसके बावजूद भी यूनियन के प्रति भारत सरकार पूरी तरह संवेदनशील है.Also Read - लोन ऐप के चक्कर में फंस गया इंजीनियर, फिर इतना परेशान किया कर ली आत्महत्या

कृषि मंत्री ने कहा कि हमने उनसे लगातार बात की है. अपना प्रस्ताव भी दिया है. उन्होंने उस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया तो हमने कहा है कि आपका क्या प्रस्ताव है? आप लेकर आएं तो चर्चा करेंगे. बात किस पर करनी है? बात का विषय होगा तो चर्चा होगी ना? Also Read - किसानों का 26 नवंबर को देशव्यापी प्रदर्शन, राकेश टिकैत बोले- केंद्रीय मंत्री की बर्खास्त कराकर रहेंगे

इस बीच उन्होंने एक हिंदी न्यूज चैनल से कहा कि सरकार और किसान संगठनों के बीच 11 दौर की बातचीत हो चुकी है. सरकार किसान संगठनों के सामने सात से आठ प्रस्ताव रख चुकी है, मगर संगठनों ने बिना तर्क के सभी प्रस्तावों को खारिज कर दिया. ऐसे में विषय पर चर्चा कैसे होगी. इसके संसद में कृषि कानूनों पर जो विरोध हो रहे हैं वो राजनीतिक है. Also Read - सुप्रीम कोर्ट में कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग, पहली बार आठ लाख लोगों ने देखा सीधा प्रसारण

मालूम हो कि विभिन्न किसान संगठन केंद्र कृषि बिलों का विरोध कर रहे हैं और सरकार से इन्हें वापस लेने की मांग की है. विरोध कर रहे किसान नेताओं ने गुरुवार को कहा कि उनका इरादा राष्ट्रीय राजधानी के बीचों-बीच जंतर-मंतर पर 13 अगस्त तक ‘किसान संसद’ जारी रखने का है. इससे पहले दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल ने तीन केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ जंतर-मंतर पर किसानों के प्रदर्शन की अनुमति इस शर्त पर दी थी कि 9 अगस्त को सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे के बीच अधिकतम 200 प्रदर्शनकारियों को अनुमति दी जाएगी.

गुरुवार को आंदोलनकारी किसान जंतर-मंतर पर व्यापक इंतजामों के साथ पहुंचे. एक किसान नेता ने बताया कि एक लाख से अधिक किसान जंतर मंतर पहुंचने के लिए तैयार हैं, लेकिन पुलिस ने प्रतिदिन केवल 200 लोगों को ही जाने की अनुमति दी है.

एक प्रदर्शनकारी किसान ने कहा, ‘हमने प्रत्येक किसान संघ से अधिकतम तीन व्यक्तियों का चयन किया है. इस बार हम किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए तैयार हैं, जैसे कि 26 जनवरी को क्या हुआ. सभी किसान बसों में ही विरोध स्थल पर आएंगे, और कोई निजी वाहन नहीं है. इसके अलावा, किसान संसद में शामिल होने वाले सभी लोगों के पास संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) द्वारा जारी पहचान पत्र होंगे.’ (एजेंसी इनपुट)