नई दिल्ली: शुक्रवार के दिन मुजफ्फरनगर में जाट महापंचायत बुलाई गई थी. इस पंचायत में किसान आंदोलन को समर्थन देने को लेकर फैसला लिया गया. इस पंचायत में 10,000 से अधिक किसान पहुंचे थे. इस महापंचायत में हरियाणा के जाट किसान भी शामिल हुए. बता दें कि ये किसान अब गाजीपुर बॉर्डर की तरफ किसान आंदोलन और राकेश टिकैत के समर्थन में बढ़ रहे हैं. ऐसे में जाटों का इस आंदोलन में कूदना और दिल्ली की तरफ बढ़ना भाजपा की मुश्किलें बढ़ा सकता है.Also Read - हरियाणा: कक्षा 5वीं और 8वीं के लिए भी होंगी बोर्ड परीक्षाएं, श‍िक्षा मंत्रालय ने जारी किया नोटिफिकेशन

बता दें कि किसान आंदोलन जो कि कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा था वह अचानक ही राकेश टिकैत के आंसुओं के निकलने के बाद अचानक बेहत मजबूत हो चला है. भाजपा के लिए यह चिंता की बात हो सकती है क्योंकि जाटों का इस आंदोलन में कूदना राजनीतिक नुकसान का सबक बन सकता है. बता दें कि जाट समुदाय हरियाणा हो या पश्चिम उत्तर प्रदेश भाजपा का इन क्षेत्रों में खुलकर समर्थन करती है. Also Read - हरियाणा में चला आयकर विभाग का हंटर, 550 करोड़ रुपये की बेहिसाब नकदी का पता चला

बता दें किसान आंदोलन को 2 महीने से अधिक समय हो चुका है लेकिन किसान अपनी मांगों को लेकर अड़े हुए हैं. हालांकि 26 जनवरी के दिन किसान आंदोलन के नाम पर जो किया गया उसके बाद ऐसा लगा मानों किसान आंदोलन अब समाप्त होने वाली है. लेकिन 28 तारीख की रात यूपी पुलिस, दिल्ली पुलिस और RAF के जवानों को गाजीपुर बॉर्डर खाली कराने के लिए भेजा गया लेकिन मामला यहीं पलट गया. Also Read - IRCTC Latest Update: हिसार और दिल्ली के बीच चलेगी सुपरफास्ट ट्रेन, तैयारी जारी: रिपोर्ट

क्योंकि राकेश टिकैत का एक रोता हुआ वीडियो अचानक तेजी से वायरल होने लगा जिसके बाद जो किसान संगठन भारतीय किसान यूनियन का साथ छोड़कर चले गए थे वे भी वापस आने लगे और इसी बाबत मुजफ्फरनगर जिले में महापंचायत का आयोजन किया गया था.