मुंबई: दक्षिणी मुंबई का आजाद मैदान आज सुबह हजारों किसानों के जमा होने से लाल हो गया. पिछले छह दिन से तपती धूप में 180 किलोमीटर की यात्रा कर यहां बहुत बड़ी तादाद में पहुंचे किसानों ने अपने हाथों में लाल झंडे थाम रखे हैं. वहीं, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसे लेकर विधानसभा में बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि मंत्रियों की समिति के साथ आंदोलन कर रहे किसानों के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा की जाएगी. सकारात्मक निर्णय लेने के साथ ही किसानों की मांगों पर एक टाइम लाइन तय की जाएगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों के प्रतिनिधियों को दोपहर 1 बजे चर्चा के लिए बुलाया गया है. वह भी इस बैठक में उपस्थित रहेंगे. किसानों की मांगों को ध्यान में रखकर ही, उन विभागों के मंत्रियों की कमिटी गठित की है ताकि फैसले लेने में कोई देरी न हो.

किसान बिना किसी शर्त के ऋणमाफी की मांग करते हुए विधानसभा परिसर को घेरने वाले हैं. ऋणमाफी के अलावा किसान, आदिवासी किसानों को वनभूमि हस्तांतरण करने की भी मांग कर रहे हैं. सायन क्षेत्र में के. जे. सोमैय्या मैदान में ठहरने के बाद किसान आज तड़के आजाद मैदान पहुंचे. किसानों के इस प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे माकपा से संबद्ध ऑल इंडिया किसान सभा ने बताया कि वह उस पर विचार करेंगे कि सरकार को क्या पेशकश करना है. माकपा नेता अशोक धावले ने बताया कि 50,000 किसान इस प्रदर्शन में शामिल हुए हैं. उन्होंने बताया, “हम अपनी रैली सुबह11 बजे शुरू करेंगे ताकि10 वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा दे रहे छात्रों को कोई परेशानी का सामना न करना पड़े.

शिवसेना ने भी किया किसानों का समर्थन
ठाणे जिले के आदिवासी किसान भी नासिक जिले से आए किसानों के इस विरोध प्रदर्शन में शिरकत की. महाराष्ट्र के मंत्री गिरीश महाजन ने कल उपनगरीय मुंलुंड में इस मार्च का स्वागत करते हुए कहा कि सरकार ने किसानों की पहले वाली मांगों को पूरा किया है और अब वह नई मांगों पर भी विचार करेगी. राज्य में विपक्षी पार्टी राकांपा, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना और राज्य में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार का हिस्सा शिव सेना ने भी किसानों की मांग का समर्थन किया है. मनसे प्रमुख राज ठाकरे और शिव सेना नेता आदित्य ठाकरे ने कल किसानों से मुलाकात की थी.

स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने की मांग कर रहे किसान
पिछले साल नवंबर में राज्य सरकार ने कृषि ऋणमाफी की घोषणा करते हुए इसे महाराष्ट्र के इतिहास में सबड़े बड़ी ऋणमाफी बताया था. पिछले महीने राज्य के राज्यपाल विद्यासागर राव ने राज्य विधानसभा को बताया था कि सरकार ने 31 लाख किसानों के बैंक खाते में 12,000 करोड़ रुपये हस्तांतरित की है. प्रदर्शनरत किसान स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने की मांग कर रहे हैं. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि किसानों की उत्पादन कुल लागत का डेढ़ गुना भुगतान किया जाए और इसी को ध्यान में रखते हुए न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया जाए. ऐसी संभावना कम है कि सभी किसानों को आजाद मैदान से विधानसभा परिसर की ओर जाने दिया जाएगा, लेकिन इन किसानों के नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल को मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस से मिलने की इजाजत दी जाए.