दिल्ली: एक तरफ जहां कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब और हरियाणा के किसान दिल्ली की सीमाओं के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ कई राजनीतिक दलों, नेताओं का उन्हें समर्थन मिलने लगा है. ऐसे में लोगों के अदंर एक सवाल उठने लगा है कि क्या किसान आंदोलन के राजनीतिकरण की भी अब शुरू हो चुकी है. अगर ऐसा है तो यह किसान आंदोलन के लिए सही नहीं है क्योंकि इससे किसानों का मूल मकसद राजनीति की आड़ में छिप सकता है. हालांकि इस बीच किसानों के समर्थन के लिए पूर्व सांसद और जनअधिकार पार्टी के अध्यक्ष पप्पू यादव भी मैदान में उतर गए हैं. Also Read - राहुल गांधी ने अनुराग कश्‍यप और तापसी पन्‍नू पर IT Raid को लेकर सरकार पर कसा तंज

किसान आदोलन और कृषि कानूनों के खिालफ पप्पू यादव ने गाजीपुर बॉर्डर पर पहुंचकर किसानों को अपना समर्थन दिया. इस दौरान उन्होंने कहा कि मैं यहां किसानों को समर्थन देने आया हूं, सरकार को कृषि बिल वापस लेना चाहिए. इस बिल के खिलाफ पहली लड़ाई बिहार से ही शुरू हुई थी. जब पंजाब में इस बिल के खिलाफ लड़ाई शुरू हुई, इससे 2 महीने पहले बिहार में इन कानूनों के खिलाफ लड़ाई शुरू हुई थी. Also Read - Kisan Andolan: किसान आंदोलन से NHAI के सामने बड़ी चुनौतियां, कई प्रोजेक्ट के काम लटके

पप्पू यादव ने आगे कहा कि सरकार को चाहिए वो किसानों से बात करे, दरअसल बता दें कि सरकार ने किसानों को 3 दिसंबर से पहले यानी 1 दिसंबर को ही मिलने के लिए बुला लिया है क्योंकि किसान भी जल्द से जल्द मामले का समाधान चाहते थे. ऐसे में आज दोपहर 32 किसान संगठनों के नेताओं के साथ केंद्र सरकार की बैठक विज्ञान भवन में बुलाई गई है. Also Read - Kisan Andolan: आंदोलन तेज करेंगे किसान- SKM का ऐलान, चुनावी राज्यों में BJP का करेंगे विरोध और 12 मार्च को...