नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कृषि कानूनों के खिलाफ हो रहे किसानों के प्रदर्शन और सरकार बीच छिड़े गतिरोध को सुलझाने के लिए समिति का गठन किया था. लेकिन अब भारतीय किसान यूनियन, लोकशक्ति ने कोर्ट से आग्रह किया है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित इस पैनल के सदस्यों को हटाया जाए. किसान यूनियन द्वारा दायर हलफनामे में पक्षपात की संभावना को जताया है. Also Read - Tandav Case: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "कई बार अश्लील कंटेंट दिखाते हैं कुछ OTT प्लेटफॉर्म, स्क्रीनिंग जैसा कोई नियम बनाए केंद्र"

यूनियन का कहना है इन लोगों को सदस्यों के रूप में गठित करके न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन होने वाला है. सुप्रीम कोर्ट द्वारा जिन सदस्यों की नियुक्ति की गई है वे किसानों की आवाज को कैसे सुनेंगे जब उन्होंने पहले ही तीनों कृषि कानूनों को समर्थन दिया हुआ है. Also Read - राहुल गांधी ने अनुराग कश्‍यप और तापसी पन्‍नू पर IT Raid को लेकर सरकार पर कसा तंज

इस सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायधीश एसए बोबडे ने कहा कि हम विशेषज्ञ नहीं हैं इसलिए हमने समिति में विशेषज्ञों की नियुक्ति की है. समिति के किसी सदस्य ने कृषि कानून पर अपने विचार व्यक्त किए हैं इसलिए आप उनपर संदेह कर रहे हैं. वे कृषि क्षेत्र में प्रतिभाशाली दिमाग वाले लोग हैं. आप उनके नाम पर लांछन कैसे लगा सकते हैं. Also Read - Kisan Andolan: किसान आंदोलन से NHAI के सामने बड़ी चुनौतियां, कई प्रोजेक्ट के काम लटके

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 12 जनवरी को किसानों की शिकायतों को सुनने और 8 सप्ताह में एक रिपोर्ट पेश करने के लिए 4 सदस्यी समिति का गठन किया था. इसके बाद समिति के अध्यक्ष भूपिंदर सिंह मान ने किसानों के हितों का हवाला देते हुए खुद को इस पैनल से अलग कर लिया था.