Farmers Protest: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को किसान आंदोलन और कृषि कानून मामले पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को फटकार लगाई थी. साथ ही जिस तरह के किसान आंदोलन को सरकार ने संभाला है उसपर नाराजगी व्यक्त करते हुए अदालत ने कहा था कि अब वो ही इसका निर्णय करेगी. आज इस मामले में कोर्ट अपना फैसला सुना सकती है, जिसपर सबकी नजरें टिकी हैं.Also Read - सुप्रीम कोर्ट ने EC और केंद्र को जारी किया नोटिस, कहा- सार्वजनिक पैसों से मुफ्त की चीजें बांटने वालों का पंजीकरण हो रद्द

शीर्ष अदालत ने सोमवार को ही ये संकेत दिया था कि वह किसान आंदोलन के समाधान के लिए नए कानूनों को अमल करने पर भी रोक लगा सकती है, ऐसे में समझा जा रहा है कि क्या सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद किसान आंदोलन खत्म हो जाएगा. Also Read - Reliance Vs DMRC: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, समझौते के लिए बातचीत का सवाल ही नहीं

केंद्र पर सख्ती से पेश आते हुए, भारत के मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने कृषि कानूनों को लागू करने के पीछे की प्रक्रिया पर सवाल उठाया था और सरकार द्वारा जिस तरह से विरोध प्रदर्शनों को डील किया जा रहा है, उसपर भी गहरी ‘निराशा’ व्यक्त की थी. Also Read - Supreme Court का आदेश- ट्विन-टावर में घर खरीदारों को ब्याज सहित रकम वापस करे सुपरटेक, समय सीमा 28 फरवरी तक

कोर्ट द्वारा एक समिति के गठन का भी सुझाव दिया गया था, जो जांच करेगी कि क्या कानून सार्वजनिक हित में है या नहीं. किसानों ने हालांकि किसी कमेटी के सामने पेश होने से इनकार किया है तो वहीं केंद्र ने फैसले से पहले कोर्ट में अपना हलफनामा दिया, जिसमें सफाई दी गई कि कानून बनने से पहले व्यापक स्तर पर चर्चा की गई थी. सरकार ने इस हलफनामे में कहा कि कानून जल्दबाजी में नहीं बने हैं बल्कि ये तो दो दशकों के विचार-विमर्श का परिणाम है.

हलफनामे में कहा गया कि देश के किसान खुश हैं क्योंकि उन्हें अपनी फसलें बेचने के लिए मौजूदा विकल्प के साथ एक अतिरिक्त विकल्प भी दिया गया है. जिसपर अदालत ने कहा था, ‘हमारे सामने अब तक कोई नहीं आया है जो ऐसा कहे. अगर एक बड़ी संख्या में लोगों को लगता है कि कानून फायदेमंद है तो कमिटी को बताएं.आप बताइए कि कानून पर रोक लगाएंगे या नहीं। नहीं तो हम लगा देंगे.’ इससे साफ है कि किसानों का कोई भी निहित अधिकार इन कानूनों के जरिए छीना नहीं जा रहा है.