नई दिल्ली: केंद्र के नए कृषि कानूनों को लेकर प्रदर्शन कर रहे किसानों ने कहा है कि वे 26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड निकालेंगे. स्वराज्य इंडिया के योगेंद्र यादव ने ये जानकारी दी. उन्होंने किसान संगठनों की प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि प्रदर्शनकारी किसान 26 जनवरी को दिल्ली में बाहरी रिंग रोड पर ट्रैक्टर परेड निकालेंगे.Also Read - एयरपोर्ट अफसरों ने हेलीकॉप्‍टर की उड़ान में देरी की वजह बताई तो अखिलेश बोले- मुझे कैसे पता होगा कि क्या कारण था

योगेंद्र यादव ने किसान यूनियन के संवाददाता सम्मेलन में कहा, “आज की बैठक में हमने तय किया है कि 26 जनवरी को किसान परेड का आयोजन दिल्ली के अंदर किया जाएगा. यह परेड आउटर रिंग रोड की परिक्रमा कर आयोजित की जाएगी.” Also Read - नवजोत सिंह सिद्दू पर US से 'बहन' ने लगाया 'मां' को बेसहारा छोड़ने का आरोप, पत्‍नी बोली- मैं उन्‍हें नहीं जानती

उन्होंने कहा, “हम आशा करते हैं कि दिल्ली और हरियाणा का पुलिस प्रशासन किसानों की ट्रैक्टर रैली परेड में कोई बाधा नहीं डालेगा. चाहे ट्रैक्टर हो या गाड़ी, हर वाहन पर राष्ट्रीय ध्वज होगा या फिर किसी किसान संगठन का झंडा होगा.” इसके अलावा किसान यूनियनों ने आरोप लगाया कि कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे आंदोलन का समर्थन करने वाले लोगों के खिलाफ राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) मामले दर्ज कर रहा है. Also Read - UP Elections 2022: हेलीकॉप्‍टर रोके जाने के ट्वीट के बाद अखिलेश यादव ने दिल्‍ली से मुजफ्फरनगर के लिए भरी उड़ान

क्रांतिकारी किसान यूनियन के प्रमुख दर्शन पाल ने कहा, “एनआईए ने उन लोगों के खिलाफ मामले दर्ज करना शुरू कर दिया है जो किसान आंदोलन का हिस्सा हैं या जिन्होंने इसका समर्थन किया है. सभी किसान संघ इसकी निंदा करते हैं. हम इसे हरसंभव तरीके से लड़ेंगे.”

वहीं इससे पहले नए कृषि कानूनों को लेकर 19 जनवरी को होने वाली दसवें दौर की वार्ता से पहले कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने रविवार को किसान नेताओं से फिर आग्रह किया कि वे नए कृषि कानूनों पर अपना ‘‘अड़ियल’’ रुख छोड़ दें और कानूनों की हर धारा पर चर्चा के लिए आएं.

तोमर ने मध्य प्रदेश में अपने गृह निर्वाचन क्षेत्र मुरैना रवाना होने से पहले पत्रकारों से कहा, ‘‘अब जबकि उच्चतम न्यायालय ने इन कानूनों के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है तो ऐसे में अड़ियल रुख अपनाने का कोई सवाल हीं नहीं उठता है.’’ उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि किसान नेता 19 जनवरी को होने वाली अगली बैठक में कानून की हर धारा पर चर्चा के लिए आएं. उन्होंने कहा कि कानूनों को निरस्त करने की मांग को छोड़कर, सरकार ‘‘गंभीरता से और खुले मन के साथ’’ अन्य विकल्पों पर विचार करने के लिए तैयार है.

गौरतलब है कि केन्द्र के नये कृषि कानूनों के खिलाफ किसान विशेषकर हरियाणा और पंजाब के किसान दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन कर रहे हैं. उच्चतम न्यायालय ने केंद्र के तीन नये कृषि कानूनों के क्रियान्वयन पर 11 जनवरी को अगले आदेश तक के लिए रोक लगा दी थी. साथ ही, न्यायालय ने गतिरोध का हल निकालने के लिए चार सदस्यीय एक समिति भी नियुक्त की थी.