नई दिल्ली: फारूक अब्दुल्ला के नेतृत्व में नेशनल कॉन्फ्रेंस के एक प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की और राज्य में विधानसभा चुनाव इसी साल कराने का अनुरोध किया. प्रतिनिधिमंडल ने मोदी से यह भी सुनिश्चित करने का अनुरोध किया कि ऐसा कोई कदम ना उठाया जाए, जिससे कश्मीर घाटी में स्थिति बिगड़े. प्रतिनिधिमंडल ने करीब 20 मिनट तक प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की. मीडिया के एक सवाल के जवाब में उमर ने कहा कि जब हम कहते हैं कि कोई कदम नहीं उठाना चाहिए, इसका मतलब है, इसमें सभी मुद्दे आते हैं, अनुच्छेद 35-ए और अनुच्छेद 370 भी. हमारा मत है कि एक नई सरकार बने और इस पर फैसला ले. लोगों को तय करने देते हैं कि वे किसे चुनना चाहते हैं. हम लोगों के फैसले को स्वीकार करेंगे.

नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री के साथ मुलाकात बेहद सौहार्दपूर्ण रही और मोदी ने उन्हें अपनी भावनाओं (जम्मू कश्मीर पर) से अवगत कराया. प्रधानमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल से क्या कहा इसका खुलासा न करते हुए उमर ने कहा, ” हम बैठक से संतुष्ट हैं. यह बैठक केंद्र द्वारा घाटी में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल की 100 अतिरिक्त कंपनियां भेजे जाने के बाद हुई है.

नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने मुलाकात के बाद बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री को मौजूदा स्थिति और लोगों की शंकाओं से अवगत कराया. पार्टी के सांसद हसनैन मसूदी भी इस प्रतिनिधिमंडल में शामिल थे.

उमर अब्दुल्ला ने पत्रकारों से कहा, हमने प्रधानमंत्री से दो मुद्दों पर बातचीत की. हमने उनसे कहा कि ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जाना चाहिए जिससे कश्मीर घाटी में स्थिति खराब हो. हमने उनसे यह भी कहा कि विधानसभा चुनाव साल समाप्त होने से पहले कराए जाएं. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को बताया गया कि काफी कठिनाइयों के बाद कश्मीर घाटी में स्थिति में सुधार है और यह पिछले साल से बेहतर है, लेकिन स्थिति किसी भी वक्त बिगड़ सकती है.

नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता उमर अब्दुल्ला ने कहा, हमने उन्हें लोगों की भावना के बारे में बताया और यह भी जानकारी दी कि लोगों के दिमाग में तनाव है. यह पूछे जाने पर कि क्या इस दौरान संविधान के अनुच्छेद 35-ए को रद्द करने को लेकर लग रही अटकलों पर भी प्रधानमंत्री के साथ चर्चा हुई, उमर ने कहा कि उन्होंने इसके बारे में निर्दिष्ट नहीं किया. उन्होंने कहा, लेकिन, जब हम कहते हैं कि कोई कदम नहीं उठाना चाहिए, इसका मतलब है इसमें सभी मुद्दे आते हैं, अनुच्छेद 35-ए और अनुच्छेद 370 भी. हमारा मत है कि एक नई सरकार बने और इस पर फैसला ले. लोगों को तय करने देते हैं कि वे किसे चुनना चाहते हैं. हम लोगों के फैसले को स्वीकार करेंगे.