नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और लोकसभा सदस्य फारूक अब्दुल्ला ने शनिवार को केंद्रशासित प्रदेश की मौजूदा स्थिति का मुद्दा शनिवार को सदन में उठाया और कहा कि चीन की तरह दूसरे पड़ोसी देश से भी बातचीत होनी चाहिए. उन्होंने सदन में शून्यकाल के दौरान कहा कि वे उन सभी लोगों का आभार प्रकट करना चाहता हैं जिन्होंने उनके हिरासत में रहने के दौरान समर्थन जताया. Also Read - ‘पीपुल्स एलायंस’ की बैठक में बोले फारूक अब्दुल्ला, 'हम भाजपा विरोधी हैं, देश विरोधी नहीं'

हिरासत से रिहा होने के बाद पहली बार लोकसभा में आपनी बात रखते हुए नेशनल कांफ्रेंस के नेता ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में प्रगति होनी चाहिए थी लेकिन वहां कोई प्रगति नहीं हुई है. उन्होंने कहा, ‘‘ आज हमारे बच्चों और दुकानदारों के पास 4जी इंटरनेट की सुविधा नहीं है, जबकि पूरे देश में है.’’ Also Read - कश्मीर में भारत 22 अक्टूबर को मनाएगा 'काला दिवस', 1947 में पाकिस्तान ने घाटी में कराई थी हिंसा

उन्होंने जम्मू-कश्मीर में कुछ लोगों के कथित मुठभेड़ में मारे जाने का उल्लेख किया और कहा कि मुझे खुशी है कि सेना ने माना कि शोपियां में गलती से तीन आदमी मारे गए. अब्दुल्ला ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि संबंधित परिवारों को उचित मुआवजा मिलेगा. उन्होंने पाकिस्तान का नाम लिए बगैर कहा कि हम जिस तरह से चीन से बात कर रहे हैं उसी तरह पड़ोसी से बात करनी पड़ेगी. रास्ता निकालना पड़ेगा. Also Read - फारूक अब्दुल्ला को दूसरी बार ED का समन, नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कहा- आवाज दबाने की कोशिश

अब्दुल्ला ने कहा कि अगर हिंदुस्तान तरक्की कर रहा है तो क्या जम्मू-कश्मीर को तरक्की नहीं करनी चाहिए.

(इनपुट भाषा)