नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर में होने वाले पंचायत चुनाव के बहिष्कार के फैसले के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारुख अब्दुल्ला ने शनिवार को इसमें एक और बड़ी बात जोड़ दी. फारूक अब्दुल्ला का कहना है कि जब तक केंद्र सरकार अनुच्छेद 35 A और 370 को लेकर अपना रुख साफ नहीं कर देती तब तक पार्टी पंचायत चुनाव ही नहीं लोकसभा और विधानसभा चुनाव का भी बहिष्कार करेगी.

ये मिले हैं अधिकार
अनुच्छेद 35-ए के तहत जम्मू-कश्मीर के स्थायी निवासियों को खास तरह के अधिकार और कुछ विशेषाधिकार दिए गए हैं. अनुच्छेद 35 ए को 1954 में राष्ट्रपति के आदेश (प्रेसीडेंशियल आर्डर) से संविधान में शामिल किया गया था. इसके तहत जम्मू कश्मीर के नागरिकों को कुछ विशेष अधिकार प्राप्त हैं. इस अनुच्छेद में की गई व्यवस्था के तहत राज्य के बाहर का कोई भी व्यक्ति प्रदेश में अचल संपत्ति नहीं खरीद सकता है. यह व्यवस्था प्रदेश की उस महिला को भी संपत्ति अधिकारों से वंचित कर देती है जो राज्य के बाहर विवाह करती है. यह प्रावधान उनके उत्तराधिकारियों पर भी लागू होता है.

जनवरी तक सुनवाई है स्थगित
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू कश्मीर में कानून व्यवस्था की समस्या के बारे केन्द्र और राज्य सरकार के कथन के मद्देनजर संविधान के अनुच्छेद 35-ए की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई अगले साल जनवरी के लिए स्थगित कर दी है. प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़ की खंडपीठ से केन्द्र की ओर से अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल और राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने अनुच्छेद 35-ए को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई स्थगित करने का अनुरोध किया था.

निकाय चुनाव का दिया था हवाला
उनका कहना था कि राज्य में आठ चरणों में सितंबर से दिसंबर के दौरान स्थानीय निकाय के चुनाव हो रहे हैं और वहां कानून व्यवस्था की समस्या है. इन याचिकाओं पर सुनवाई अगले साल जनवरी के दूसरे सप्ताह के लिये स्थगित करते हुये पीठ ने कहा, ‘चुनाव हो जाने दीजिये. हमें बताया गया है कि वहां कानून व्यवस्था की समस्या है.