नई दिल्ली: पाकिस्तान स्थित करतारपुर गुरुद्वारे में भारतीय तीर्थयात्री दर्शन कर सके इसके लिए कॉरिडोर का निर्माण किया जा रहा है, लेकिन इसी तरह की शारदा पीठ मंदिर को लेकर की गई एक और मांग पर पाकिस्तान सरकार द्वारा कोई प्रगति देखने को नहीं मिली है. पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में स्थित शारदा मता मंदिर कश्मीरी पंडितों के लिए पूजनीय स्थल है.

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भारत ने इस संदर्भ में पाकिस्तान को प्रस्ताव दिया है कि वह भक्तों को पीओके की राजधानी मुजफ्फराबाद से लगभग 140 किलोमीटर दूर नीलम घाटी में स्थित मंदिर में जाने की अनुमति दे, लेकिन इसे वहां की सरकार द्वारा स्वीकार नहीं किया गया है. दर्शनों की सुविधा के लिए प्रचार कर रहे कश्मीरी पंडितों का तर्क है कि नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर परमिट प्रणाली की तर्ज पर तीर्थयात्रा की अनुमति दी जा सकती है, जिसके तहत जम्मू एवं कश्मीर के दोनों ओर के निवासी दूसरी तरफ की यात्रा कर सकते हैं.

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समझौते की व्यवस्था में संशोधन करके तीर्थयात्रा को शामिल करने की मांग
नियंत्रण रेखा की अनुमति प्रणाली जम्मू एवं कश्मीर के निवासियों को केवल अपने रिश्तेदारों से मिलने के लिए विभाजित इलाकों में यात्रा करने की अनुमति प्रदान करती है. सेव शारदा समिति के संस्थापक रविंदर पंडित ने कहा कि हम चाहते हैं कि भारत और पाकिस्तान के बीच इस समझौते की व्यवस्था में संशोधन करके तीर्थयात्रा को शामिल किया जाए. रविंदर पंडित अपने संगठन की मदद से इस अभियान को चला रहे हैं. उन्होंने कई बार भारत सरकार में विभिन्न स्तरों पर इस मांग को उठाया है, लेकिन उन्हें इसमें शामिल जटिलताओं के बारे में बताकर इसमें कोई प्रगति नहीं हो पाई है.