नई दिल्ली. अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के वित्तपोषण की निगरानी करने वाली संस्था वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (FATF) ने गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए शुक्रवार को पुलवामा आतंकवादी हमले की निंदा की. इसके साथ ही एफएटीएफ ने जैश-ए-मोहम्मद (JeM), लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और जमात-उद-दावा (JuD) जैसे आतंकवादी संगठनों की फंडिंग रोकने में नाकाम रहने पर पाकिस्तान को ‘ग्रे’ सूची में बरकरार रखने का फैसला किया. एक सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि पाकिस्तान को ‘ग्रे’ सूची में बनाए रखने का मतलब है कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF), विश्व बैंक, एशियाई विकास बैंक (ADB), यूरोपीय संघ (EU) जैसी वित्तीय संस्थाएं उसकी ग्रेडिंग कम कर देंगी और मूडीज, एस एंड पी और फिच जैसी रेटिंग एजेंसियां उसकी रेटिंग कम कर सकती हैं. पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर इन कदमों का नकारात्मक प्रभाव होगा.Also Read - Sri Lanka vs India, 2nd ODI: टीम इंडिया ने पाकिस्तान को पछाड़ा, इस मामले में बनी नंबर-1

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पेरिस स्थित इस संस्था ने एक बयान में कहा कि पाकिस्तान को अपनी रणनीतिक खामियों को दूर करने की अपनी योजना पर अमल के लिए काम जारी रखना चाहिए. इसके तहत वह आतंकवादी संगठनों की ओर से पेश की जा रही आतंकवादी वित्तपोषण के जोखिमों की उचित समझ पर्याप्त रूप से दिखाए और जोखिम को लेकर संवेदनशीलता के आधार पर निगरानी करे. करीब एक हफ्ते लंबे अपने अधिवेशन के बाद FATF ने कहा कि वह पिछले हफ्ते जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में भारतीय सुरक्षा बलों पर हुए आतंकी हमले पर गौर करते हुए गंभीर चिंता जताता है और उसकी निंदा करता है.

पुलवामा में हुए हमले में कम से कम 40 जवान शहीद हुए थे. जैश-ए-मोहम्मद ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है. FATF ने कहा, ‘‘पाकिस्तान ने अपना टीएफ (आतंकी वित्तपोषण) जोखिम आकलन पुनरीक्षित किया है. बहरहाल, वह दाएश (ISIS), अल-कायदा, जेयूडी (जमात-उद-दावा), एफआईएफ (फलह-ए-इंसानियत फाउंडेशन), एलईटी (लश्कर-ए-तैयबा), जेईएम (जैश-ए-मोहम्मद), एचक्यूएन (हक्कानी नेटवर्क) और तालिबान से जुड़े लोगों की ओर से पेश किए जा रहे टीएफ जोखिम की उचित समझ नहीं दिखा रहा.’’

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जनवरी 2019 में अमल के लिए तैयार की गई कार्य योजना पर सीमित प्रगति को देखते हुए एफएटीएफ ने पाकिस्तान से अपील की कि वह अपनी कार्य योजना, खासकर मई 2019 की समयसीमा वाली, तेजी से पूरी करे. एफएटीएफ के अधिवेशन में शिरकत करने वाले एक भारतीय अधिकारी ने बताया कि निपटारा दस्तावेज में रखने का मतलब है कि देश को ‘ग्रे’ सूची में रखा जाएगा और जून 2019 में इसकी फिर से समीक्षा की जाएगी. जून 2018 में पाकिस्तान को ‘ग्रे’ सूची में डाला गया था और एफएटीएफ द्वारा 27 सूत्री कार्ययोजना दी गई थी. अक्टूबर 2018 में हुए पिछले अधिवेशन में इस योजना की समीक्षा की गई थी. इस हफ्ते हुई बैठक में दूसरी बार इसकी समीक्षा की गई.

(इनपुट – एजेंसी)