श्रीनगर. संसद पर हमले के मामले में दोषी अफजल गुरु की पांचवीं बरसी के अवसर पर उसके अवशेषों को वापस लाने के लिए दबाव बनाने के लक्ष्य से अलगाववादियों द्वारा आहूत हड़ताल के कारण शुक्रवार को कश्मीर में सामान्य जीवन प्रभावित हुआ है. संयुक्त प्रतिरोध नेतृत्व की ओर से आहूत हड़ताल के कारण कश्मीर के ज्यादातर हिस्से में दुकानें और व्यापारिक प्रतिष्ठान शुक्रवार को बंद रहे. 

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अधिकारियों ने बताया कि सार्वजनिक परिवहन नहीं चल रहे थे, हालांकि शहर के सिविल लाइन इलाके में कुछ निजी वाहन जरूर सड़कों पर दिखे. उन्होंने बताया कि अधिकारियों ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए खन्यार, करालखुड, महाराजगंज, मैसुमा, नौहाटा, रैनावाड़ी और सफकदल थाना क्षेत्रों में सीआरपीसी की धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लगा दी है. Also Read - जम्‍मू-कश्‍मीर में नार्को- आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़, 65 करोड़ रुपए के नशीले ड्रग्‍स और हथियार बरामद

अधिकारियों ने बताया कि अफजल गुरू के पैतृक गांव सोपोर में भी निषेधाज्ञा लगाई गई है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके. अलगाववादी नेताओं सैयद अली शाह गिलानी, मीरवाइज उमर फारूक और मोहम्मद यासिन मलिक ने जेएलआर के बैनर तले अफजल गुरु की फांसी के विरोध और उसके अवशेषों को वापस लाने के लिए दबाव बनाने के उद्देश्य से हड़ताल का आह्वान किया है.

गुरु को 2001 में संसद पर हुए हमले के संबंध में 2013 में फांसी की सजा दी गयी थी. उसके शव को दिल्ली स्थित तिहाड़ जेल में दफनाया गया है.