नई दिल्ली। सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस जल्द ही इंडियन एयरफोर्स में शामिल होने जा रहा है. ब्रह्मोस एयरोस्पेस के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया है कि मई के दूसरे हफ्ते में हवा में प्रक्षेपण योग्य मिसाइल का परीक्षण किया जाएगा. इसके बाद मई के अंतिम हफ्ते या जून के पहले सप्ताह में जैसलमेर के पोखरण में मिसाइल का फाइनल परीक्षण किया जाएगा.

रिपोर्ट के मुताबिक, इन सभी अहम परीक्षणों के कामयाब होने के बाद मिसाइल भारतीय वायु सेना में शामिल होने के लिए तैयार हो जाएगा. ब्रह्मोस एयरोस्पेस कम्पनी के संस्थापक और मिसाइल-वैज्ञानिक सिवाथानु पिल्लई ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल को ‘भारतीय सेना का ब्रह्मास्त्र’ कहना पसंद करते हैं.

ब्रह्मोस का निर्माण करके ‘इण्डो-रशिया ब्रह्मोस एयरोस्पेस’ कम्पनी ने क्रूज मिसाइलों के विकास के क्षेत्र में एक नया मानक स्थापित किया है. साथ ही, उससे भी एक कदम आगे जाकर एकदम नया, उन्नत और अभिनव किस्म की मिसाइल बना दी है, जिसका इस्तेमाल सेना के सभी अंग कर सकते हैं. फिलहाल भारत की नौसेना और थलसेना को बड़ी संख्या में ब्रह्मोस मिसाइलों से लैस किया जा रहा है.

600 किमी दूरी पर भी दुश्मन को मार गिराएगी ब्रह्मोस मिसाइल
ब्रह्मोस मिसाइल की मारक-दूरी शुरू में सिर्फ़ 290 किलोमीटर रखी गई थी. ऐसा इसलिए था क्योंकि रूस मिसाइल प्रौद्योगिकी नियन्त्रण व्यवस्था (एमटीसीआर) का सदस्य है और उसे उसके नियम मानने पड़ते हैं. इस बाधा को दूर करने के लिए यह तय किया गया कि भारत भी मिसाइल प्रौद्योगिकी नियन्त्रण व्यवस्था का सदस्य बन जाए. अब इस व्यवस्था का सदस्य बनने के बाद ब्रह्मोस एयरोस्पेस ऐसे मिसाइल बना सकता है, जो 300 किलोमीटर से भी ज़्यादा लम्बी दूरी तक मार कर सकेंगी.

लेकिन अब ब्रह्मोस मिसाइल की मारक-दूरी क्षमता बढ़ाने के लिए भारत के सामने कोई परेशानी नहीं है. 11 मार्च 2017 को भारत ने यह तय कर लिया है कि ब्रह्मोस मिसाइल की मारक-दूरी क्षमता बढ़ाकर 600 किलोमीटर कर दी जाएगी. अब भारतीय युद्धपोत अधिक दूरी पर रहकर ब्रह्मोस मिसाइल से दुश्मन पर निशाना साध सकेंगे.