नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने एयर इंडिया के निजीकरण की वकालत की है. सरकारी विमानन कंपनी के लगातार घाटे में जाने और उसके निजीकरण की तैयारियों को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में जेटली ने कहा, ‘मैं पहले ही बता चुका हूं कि एयर इंडिया का निजीकरण क्यों किया जाना चाहिए.Also Read - BPCL Sale: पहली छमाही में BPCL विनिवेश करने की संभावना कम, अंतिम तिमाही में आएगा LIC का IPO: दीपम सचिव

उन्होंने कहा कि एयरलाइंस का मार्केट शेयर केवल 14 फीसदी है, ऐसे में करदाताओं के 55 से 60 हजार करोड़ रुपए का इस्तेमाल कितना जायज है. उन्होंने कहा कि सरकार को 15 साल पहले एयर इंडिया से बाहर हो जाना चाहिए था. वित्त मंत्री ने कहा कि वह नीति आयोग के कर्ज में डूबी एयरलाइंस के निजीकरण के विचार से सहमत हैं लेकिन इस मुद्दे पर सरकार ही निर्णय लेगी. Also Read - Air India Sale: टाटा ने एसपीए के बाद एयर इंडिया को ऑन-बोर्ड करने के लिए नए वर्टिकल की योजना बनाई

जेटली ने कहा कि नागर विमानन क्षेत्र भारत में सफल की एक नई कहानी बनता जा रहा है, निजी क्षेत्र की कई कंपनियां काफी कुशलता से एयरलाइंस चला रही हैं. साथ ही देश में हवाईअड्डे दुनिया में ज्यादातर हवाईअड्डों से बेहतर है. देश में क्षेत्रीय संपर्क के लिए भी बहुत से हवाईअड्डे हैं. Also Read - Air India Sale: सरकार ने टाटा समूह को जारी किया आशय पत्र, अब होंगे शेयर खरीद समझौते पर हस्ताक्षर

जेटली ने सोमवार को सीएनबीसी टीवी 18 से कहा, ‘इसीलिए क्या यह सही है कि सरकार बाजार में मात्र 14 फीसदी हिस्सेदारी रखे और इसके लिए करदाताओं का 50 से 60 हजार करोड़ रुपए डालना पड़े.एयर इंडिया के उपर 50,000 करोड़ रुपये  से अधिक का कर्ज है. इसका मुख्य कारण उच्च रखरखाव लागत और पट्टा किराया है. वित्त वर्ष 2015-16 को छोड़कर कंपनी को शायद ही कभी मुनाफा हुआ.

जेटली ले कहा, “मुझे लगता है कि जितनी जल्दी सरकार इससे बाहर होगी उतना बेहतर होगा. इसे डेढ दशक पहले ही इससे बाहर हो जाना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं हुआ.