पेरिस. मेडिकल साइंस की दुनिया में पहली बार एक मृत डोनर से युटेरस ट्रांसप्लांट कराके बच्ची को जन्म दिया है. Lancet में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2016 में ब्राजिल के सौ पाउलो में एक रिसर्च में पाया गया था कि इस तरह का ऑपरेशन संभव है. इससे हजारों ऐसी महिलाओं के जीवन में आस जगी है जो यूटेरिन प्रॉब्लम की वजह से बच्चे पैदा करने में अक्षम हैं.

जर्नल में बताया गया है कि महिला की सुरक्षा के लिए उसे 5 अलग-अलग दवाइयां दी गई थीं. 5 महीने के बाद यूटेरस में किसी तरह का इन्फेक्शन नहीं पाया गया और उसका अल्ट्रासाउंड स्कैन नॉर्मल रहा. 7 महीने बाद फर्टिलाइज एग को इम्प्लांट कर दिया गया. इसके 10 दिन बाद डॉक्टरों ने बताया कि वह प्रेग्नेंट है. इस दौरान उसे माइनर किडनी इन्फेक्शन हुआ. 36 हफ्ते के बाद उसे 2.5 किलो का एक स्वस्थ बच्चा हुआ. मां और बच्ची अस्पताल से डिस्चार्ज हो गए हैं.

दिसंबर 2017 में हुआ
मेडिकल जर्नल के मुताबिक, बच्ची का जन्म पिछले साल दिसंबर 2017 में हुआ है. अबतक, कथित यूटेरिन इनफर्टिलिटी के लिए सरोगेसी की ही एक व्यवस्था थी. हालांकि, साल 2014 में पहली बार जिंदा डोनर की मदद से यूटेरिन ट्रांसप्लांट से बच्चे का सफलतापूर्वक जन्म हुआ था. डॉक्टरों ने कहा है कि वे अभी और महिलाओं में मृत डोनर से ट्रांसप्लांट कराके देखेंगे उसके बाद ही इस पूरी व्यवस्था को हरी झंडी दिखाई जा सकेगी. बुधवार को रिपोर्ट जारी करने के से पहले यूनाइटेड स्टेट्स, चेक गणराज्य और तुर्की में 10 सफल प्रयास हुए हैं.

500 में एक महिला को परेशानी
रिसर्च में ये भी कहा गया है कि इनफर्टिलिटी दुनिया की 10 से 15 फीसदी कपल में होता है. इसमें कहा गया है कि 500 महिलाओं में एक महिला के यूटेरस में परेशानी होती है. इसके पीछे विकृति, हिस्टरेक्टमी या इन्फेक्शन जैसे कारण हैं. इन वजहों से वह प्रेग्नेंट नहीं हो पाती हैं.

32 साल की थी महिला
जर्नल में बताया गया है कि 32 साल की महिला का बिना यूटेरस के जन्म हुआ था. इसके पीछे एक रेयर सिंड्रोम कारण था. ट्रांसप्लासे से कुछ महीने पहले उसने विट्रो फर्टिलाइजेशन कराया था. डोनर एक 45 साल की महिला थी, जिसका एक स्ट्रोक की वजह से डेथ हो गई थी. उसका यूटेरस निकाल दिया गया था और 10 घंटे की सर्जरी के बाद ट्रांसप्लांट किया गया था.