नई दिल्लीः बाबूलाल मरांडी झारखंड की राजनीति में एक ऐसा नाम है जिसे किसी परिचय या पहचान की जरूरत नहीं है. झारखंड की राजनीति में बाबूलाल मरांडी का एक प्रमुख किरदार है. 2019 का विधानसभा चुनाव बाबूलाल मरांडी के लिए बेहद खास है. बाबूलाल का जन्म 11 जनवरी 1958 को गिरडीह जिले के कोडिया बैंग गांव में हुआ था. बचपन से ही बाबूलाल मरांडी का राजनीति में लगाव था और वह स्कूल के दिनों में राजनीतिक कार्यक्रमों में भाग लेते रहते थे. अपने स्कूल के दिनों में ही वे आरएसएस से जुड़ गए थे.

सबसे पहले उन्होंने 1991 में राजनीति में कदम रखा. इस वर्ष उन्होंने भाजपा की टिकट से दुमका लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा लेकिन उन्हें इसमें हार का सामना करना पड़ा. इसके बाद वे एक बार चुनावी मैदान में शिबू शोरेन के सामने 1996 में आए लेकिन उन्हें इस बार भी हार का सामना करना पड़ा.

भाजपा ने 1998 बाबूलाल मरांडी को पार्टी का प्रमुख चेहरा बनाया और लोकसभा चुनावों में 14 में से 12 सीटों पर जीत दर्ज की थी. मरांडी ने 1998 के चुनावों में शिबूशोरेन को भारी मतों के अंतर से हराया था.

2000 में जब बिहार का विभाजन हुआ और झारखंड अलग राज्य बना तो भाजपा ने सरकार बनाई और राज्य के पहले सीएम के तौर पर बाबूलाल मरांडी को चुना गया. 2004 के लोकसभा चुनाव में मरांडी ने कोडरमा सीट से चुनाव जीत. 2006 में उन्होंने भाजपा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया और झारखंड विकास मोर्चा नाम की पार्टी बनाई. बाद में भाजपा के पांच और सदस्य इस पार्टी में शामिल हो गए.

2009 के विधानसभा चुनाव में बाबूलाल मरांडी की पार्टी को 11 सीटों पर जीत हासिल हुई थी, वहीं 2014 के विधानसभा चुनाव में इस पार्टी को 8 सीटों पर जीत मिली थी. 2014 के विधानसभा चुनाव में बाबू लाल मरांडी ने दो सीटों से चुनाव लड़ा था लेकिन उन्हें दोनों ही सीट से हार का सामना करना पड़ा था.