नई दिल्ली: दिल्ली की एक अदालत ने 1984 के सिख विरोधी दंगों में दो लोगों की हत्या के दोषी यशपाल सिंह को मंगलवार को फांसी की सजा सुनाई. इस मामले में पहली बार किसी को मौत की सजा सुनाई गई है. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अजय पांडे ने मामले में सह दोषी नरेश सहरावत को भी उम्रकैद की सजा सुनाई. सभी राजनीतिक दलों और संगठनों ने इस फैसले का स्‍वागत किया है. Also Read - 10 लाख लोगों को मुफ्त भोजन कराएगी दिल्ली सरकार, बुधवार से नियम लागू

दिल्ली अदालत परिसर में दोषियों पर हमले और सुरक्षा चिंताओं के चलते फैसला तिहाड़ जेल में सुनाया गया. अदालत ने 14 नवंबर को सिंह और सहरावत को 1984 में यहां सिख विरोधी दंगों के दौरान दो लोगों की हत्या करने का दोषी पाया था. एसआईटी द्वारा मामला फिर से खोले जाने के बाद पहली बार किसी को दोषी पाया गया. Also Read - केजरीवाल ने लोगों को गीता पाठ करने की दी सलाह, कहा- गीता के 18 अध्याय की तरह लॉकडाउन के बचे हैं 18 दिन 

पार्टी विचारधारा से अलग हटकर सिख नेताओं ने 1984 के सिख विरोधी दंगा मामले में एक दोषी को मृत्युदंड सुनाये जाने के अदालती आदेश का मंगलवार को स्वागत किया. उन्‍होंने प्रत्येक पीड़ित को न्याय मिलने तक अपनी लड़ाई जारी रखने की प्रतिबद्धता भी जताई. Also Read - दिल्ली सरकार को सोशल मीडिया पर नफरत फैलाने की मिलीं 7 हजार शिकायतें, हो सकती है कार्रवाई

अकाली दल नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि वे सहरावत को सुनायी गयी आजीवन कारावास की सजा को चुनौती देंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि उसे भी उसके अपराधों के लिए फांसी की सजा मिले. सिरसा ने कहा, ‘‘हम निर्णय से संतुष्ट हैं किन्तु हम लड़ाई जारी रखेंगे और एक आरोपी को सुनायी गयी आजीवन कारावास की सजा को चुनौती देंगे. हम यह सुनिश्चित करेंगे उसे भी उसके अपराधों के लिए फांसी मिले.’’

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दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति के प्रमुख एवं अकाली दल के नेता मंजीत सिंह जी ने कहा कि निर्णय से अन्य पीड़ित सामने आने के लिए प्रोत्साहित होंगे. भाजपा के राष्ट्रीय सचिव सरदार आर पी सिंह ने निर्णय का स्वागत किया. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया कि दिल्ली एवं अन्य राज्यों में 1984 के सिख विरोधी दंगों की जांच की निगरानी के लिए गठित विशेष जांच दल के तीसरे सदस्य का नाम तुरंत अधिसूचित किया जाए. आम आदमी पार्टी के नेता एच एस फुल्का ने कहा कि यह बड़ा फैसला है और सिख नेताओं में यह आस जागी है कि अन्य मामलों में भी पीड़ितों को न्याय मिलेगा. दिल्ली पुलिस ने साक्ष्यों के आभाव में 1994 में मामला बंद कर दिया था. हालांकि दंगों को लेकर गठित एक विशेष जांच दल ने मामले को फिर से खोला.

पार्टी विचारधारा से अलग हटकर सिख नेताओं ने 1984 के सिख विरोधी दंगा मामले में एक दोषी को मृत्युदंड सुनाये जाने के अदालती आदेश का मंगलवार को स्वागत किया. उन्‍होंने प्रत्येक पीड़ित को न्याय मिलने तक अपनी लड़ाई जारी रखने की प्रतिबद्धता भी जताई.

 

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अकाली दल नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि वे सहरावत को सुनायी गयी आजीवन कारावास की सजा को चुनौती देंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि उसे भी उसके अपराधों के लिए फांसी की सजा मिले. सिरसा ने कहा, ‘‘हम निर्णय से संतुष्ट हैं किन्तु हम लड़ाई जारी रखेंगे और एक आरोपी को सुनायी गयी आजीवन कारावास की सजा को चुनौती देंगे. हम यह सुनिश्चित करेंगे उसे भी उसके अपराधों के लिए फांसी मिले.’’

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दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति के प्रमुख एवं अकाली दल के नेता मंजीत सिंह जी ने कहा कि निर्णय से अन्य पीड़ित सामने आने के लिए प्रोत्साहित होंगे. भाजपा के राष्ट्रीय सचिव सरदार आर पी सिंह ने निर्णय का स्वागत किया. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया कि दिल्ली एवं अन्य राज्यों में 1984 के सिख विरोधी दंगों की जांच की निगरानी के लिए गठित विशेष जांच दल के तीसरे सदस्य का नाम तुरंत अधिसूचित किया जाए. आम आदमी पार्टी के नेता एच एस फुल्का ने कहा कि यह बड़ा फैसला है और सिख नेताओं में यह आस जागी है कि अन्य मामलों में भी पीड़ितों को न्याय मिलेगा.