नई दिल्लीः नौ हजार करोड़ रुपये के लोन धोखाधड़ी के आरोपी उद्योगपति विजय माल्या के देश से फरार होने को लेकर विपक्ष के आरोपों का सामना कर रही केंद्र सरकार के बचाव में सीबीआई उतर आई है. देश की इस सर्वोच्च जांच एजेंसी ने मंगलवार को कहा कि हवाई अड्डे पर कारोबारी विजय माल्या को हिरासत में लेने के लिए जारी लुक आउट नोटिस कानून की नजरों में टिकाऊ नहीं था और उसमें सुधार की जरूरत थी क्योंकि उस वक्त उसके खिलाफ कोई वारंट जारी नहीं था. जांच एजेंसी के सूत्रों ने कहा कि एजेंसी अब भी अपनी उस स्थिति पर कायम है कि 24 नवंबर 2015 को माल्या को गिरफ्तार करने का कोई आधार नहीं था, जब वह 16 अक्तूबर 2015 को उसे हिरासत में लेने के लिये जारी लुक आउट सर्कुलर (एलओसी) के आधार पर लंदन से लौटा था.

राफेल डील पर एंटनी का हमला, जेपीसी जांच से बचकर अपनी गलती छिपाना चाहती है सरकार

सूत्रों ने कहा कि पहले सर्कुलर में बदलाव की जरूरत थी क्योंकि माल्या एजेंसी से सहयोग कर रहा था, तब साक्ष्य जुटाए ही जा रहे थे, वह सांसद था और उसके खिलाफ कोई वारंट नहीं था. नोटिस में सुधार की जरूरत महसूस करते हुए एजेंसी ने आव्रजन अधिकारियों को लिखा कि वह नोटिस में बदलाव करें कि माल्या को हिरासत में लेने के बजाए जब भी वह विदेश जाए तो उसे सूचित किया जाए.

आप का बीजेपी पर हमला, कहा- चेहरे पर जो लाली है, वो राफेल की दलाली है

उन्होंने कहा कि यह सुधारा हुआ सर्कुलर 24 नवंबर 2015 को जारी किया गया था और नोटिस जारी किये जाने के बाद भी माल्या ने दस्तावेज उपलब्ध कराए तथा जांच दल के सवालों का जवाब दिया. उन्होंने कहा कि नया एलओसी जारी होने के बाद वह तीन बार पूछताछ के लिये पेश हुआ और चार बार विदेश यात्रा पर गया. 62 वर्षीय माल्या 9000 करोड़ रूपये की धोखाधड़ी और धनशोधन मामले का सामना कर रहा है और दो मार्च 2016 को उसने देश छोड़ दिया था. फिलहाल वह अपने भारत प्रत्यर्पण के खिलाफ मुकदमा लड़ रहा है.

(इनपुट-भाषा)