नई दिल्ली। कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ कदम मिलाकर चलने वाले आंध्र प्रदेश के सीएम एन चंद्रबाबू नायडू केंद्र सरकार को ही गिरा देना चाहते हैं. आंध्र को विशेष राज्य का दर्जा देने से नाराज टीडीपी ने एनडीए से दोस्ती की डोर खींच ली है. शुक्रवार को र्टी पोलित ब्यूरो की बैठक में नायडू ने एनडीए से अलग होने का ऐलान कर दिया था. मामला सिर्फ यही तक सीमित नहीं था, टीडीपी ने सरकार के खिलाफ संसद में अविश्वास प्रस्ताव लाने का भी ऐलान कर चौंका दिया. Also Read - VIDEO: सरकारी दफ्तर में महिला ने मास्क पहनने को कहा, शख्स ने ज़मीन पर पटक लात घूंसों से पीटा

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आंध्र की जनता का हमदर्द बनने की होड़ में वाईएसआर कांग्रेस, टीडीपी से पहले ही केंद्र सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दे चुकी थी. वाईएसआर कांग्रेस भी टीडीपी की तर्ज पर ही आंध्र को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग पर ही अविश्वास प्रस्ताव ला रही है. संसद में टीडीपी के 16 और वाईएसआर कांग्रेस के 9 सांसद हैं. हालांकि इस प्रस्ताव से सरकार को कोई खतरा नहीं है. अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए 50 सांसदों के समर्थन की जरूरत है. अगर प्रस्ताव स्वीकार भी हो जाता है तो बीजेपी के पास अकेले दम पर ही बहुमत से 4 ज्यादा 274 सांसद हैं. Also Read - सत्तारूढ़ पार्टी YSR कांग्रेस के सांसद ने जान पर खतरा बताया, लोकसभा अध्यक्ष से सुरक्षा मांगी

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क्या कहता है संसद का गणित?

आइए जानते हैं कि लोकसभा में सांसदों का आंकड़ा क्या कहता है. लोकसभा में कुल 536 सांसद हैं. इनमें बीजेपी के 274 सांसद, कांग्रेस के 48 सांसद, एआईएडीमके के 37, तृणमूल कांग्रेस के 34, बीजू जनता दल के 20, शिवसेना के 18, टीडीपी के 16, टीआरएस के 11, सीपीएम-वाईएसआर कांग्रेस के 9-9, लोक जनशक्ति पार्टी और एनसीपी के 6-6 सांसद, सपा के 5, अकाली दल-आप के 4-4 सांसदों सहित अन्य छोटे दलों के 35 सांसद शामिल हैं.

टीडीपी के एनडीए से अलग होने के बाद एनडीए में 312 सांसद रह गए हैं. बीजेपी के पास 274 सांसद हैं. ऐसे में अविश्वास प्रस्ताव आ भी जाता है तो सरकार को कोई खतरा नहीं है. लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में बीजेपी की अपनी साख जरूर प्रभावित होगी. संसद में उसके अपने पुराने साथी ही उस पर हमला बोलेंगे. विपक्षी दल के नेता अपने भाषण में सरकार पर पुरजोर हमला बोलेंगे. पुराने साथी बताएंगे कि क्यों उन्हें दोस्ती तोड़ने पर मजबूर होना पड़ा.

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खतरे में पड़ सकता है मिशन 2019

बहरहाल,  बीजेपी के लिए आने वाले दिन मुश्किल भरे हैं. वह एक के बाद एक साथियों को गंवाती जा रही है. इससे पहले शिवसेना बीजेपी से दोस्ती तोड़ चुकी है. शिवसेना के 18 सांसद हैं. आरएलएसपी जैसी कुछ और छोटी पार्टियां बीजेपी से नाराज बताई जाती हैं. एक के बाद एक साथियों के कम होने से बीजेपी का मिशन 2019 प्रभावित हो सकता है. कुछ महीने पहले तक बीजेपी के लिए मैदान खुला नजर आ रहा था, लेकिन अब हालात बदले से दिखाई दे रहे हैं. गोरखपुर और फूलपुर की करारी हार ने बीजेपी को नए सिरे से मंथन पर मजबूर कर दिया है. 2014 में यूपी में बीजेपी को 80 में से 71 सीटें मिली थीं. तब सपा-बसपा ने अलग अलग चुनाव लड़ा था और दोनों का सूपड़ा साफ हो गया था. लेकिन 2019 में अगर इनके बीच गठजोड़ हो जाए तो बीजेपी का खेल बिगड़ सकता है.