नई दिल्ली. भारतीय अंतरिक्ष संस्थान (ISRO) ने नया इतिहास रच दिया है. इसरो ने श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से दुनिया के सबसे हल्के उपग्रह को पृथ्वी की कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया. खास बात ये है कि इसरो के पीएसएलवी-सी44 रॉकेट ने भारतीय सेना का उपग्रह माइक्रोसैट और छात्रों का उपग्रह कलामसैट लेकर अंतरिक्ष के लिए उड़ान भरी थी.

इसरो के मुताबिक, उसने पीएसएलवी-सी 44 जिकसा वजन 740 किलोग्राम है माइक्रोसैट आर को प्रक्षेपण के करीब 14 मिनट बाद कक्षा में स्थापित कर दिया. फिर 10 सेंटीमीटर के आकार और 1.2 किलोग्राम वजन वाले कलामसैट को ऊपरी कक्षा में स्थापित किया. बता दें कि क्लासमैट को हाईस्‍कूल के छात्रों ने बनाया है और इसकी लॉन्चिंग पूरी तरह से फ्री में की गई है.

12 लाख रुपये का खर्च
एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, इस सेटेलाइट को ‘स्पेस किड्ज इंडिया’ नाम के संस्था में काम करने वाले बच्चों ने बनाया है. इसका वजन एक लकड़ी के कुर्सी से भी हल्का करीब 1.26 किलोग्राम है. इसे बनाने में 12 लाख रुपये का खर्च आया है और बनाने में सिर्फ 6 दिन का समय लगा है. हालांकि, जिस ग्रुप ने इसे बनाया है, उन्होंने 6 साल से इस टेक्नॉलजी पर काम किया है.

पहली बार निजी संस्था का उपग्रह लॉन्च
पहली बार इसरो ने किसी भारतीय निजी संस्था का उपग्रह लॉन्च किया. इसरो के 2019 के पहले मिशन में 28 घंटे की उल्टी गिनती के बाद रात 11 बजकर 37 मिनट पर पीएसएलवी-सी44 ने उड़ान भरी थी. यह पीएसएलवी की 46वीं उड़ान है. भारतीय ध्रुवीय रॉकेट पीएसएलवी-सी44 छात्रों द्वारा विकसित कलामसैट और पृथ्वी की तस्वीरें लेने में सक्षम माइक्रासैट-आर को लेकर उड़ान भरेगा.