नई दिल्लीः त्रिपुरा में बीजेपी 40 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है. पहली बार प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाने जा रही है. केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता किरेन रिजीजू का कहन है कि पूर्वोत्तर के राज्यों के चुनावी रुझान एक नई राजनीतिक दिशा की ओर इशारा कर रहे हैं. इसका असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी होगा. हम तीनों राज्यों में सरकार बनाने को लेकर आश्वस्त हैं. यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि चुनावी नतीजे पीएम नरेंद्र मोदी और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की कुशल रणनीति की जीत है. योगी ने कहा कि पीएम मोदी के कुशल नेतृत्व में देश लगातार विकास कर रहा है. बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि त्रिपुरा में बीजेपी ने इतिहास रचा है. राज्य में बीजेपी ने शून्य से शुरुआत कर सरकार तक का सफर तय किया है. Also Read - यूपी के मंत्री ने कहा- कांग्रेस ने भ्रम फैलाकर पाया वोट, पछता रहे हैं मध्यप्रदेश के लोग

बीजेपी नेता राम माधव ने कहा कि त्रिपुरा के चुनावी नतीजों से हम संतुष्ट हैं. हमें पूरा विश्वास है कि 40 से अधिक सीटें हासिल कर हम एक परिवर्तनकारी सरकार बनाएंगे. त्रिपुरा की जनता के आशीर्वाद से हम इस ऐतिहासिक जीत को हासिल कर सके हैं. पीएम मोदी की मेहनत का इस जीत में बड़ा योगदान है. राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने भी पूरा फोकस बनाए रखा और राज्य में काफी वक्त बिताया. राज्य के कार्यकर्ताओं के प्रयास का हम अभिनंदन करते हैं. Also Read - एमएनएफ के प्रमुख जोरमथंगा ने ली मिजोरम के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ

पीएम ने खुद किया था प्रचार
पूर्वोत्तर राज्यों में बीजेपी कमल खिलाने में जुटी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां खुद चुनाव प्रचार किया. एक रैली में उन्होंने कहा कि यहां गणतंत्र नहीं गनतंत्र है. असम के अलावा पूर्वोत्तर के दो और राज्यों अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर में बीजेपी पहले से ही सत्ता में है. इसी साल नवंबर में मिजोरम में विधानसभा चुनाव होने हैं. असम, अरुणाचल और मणिपुर के बाद त्रिपुरा और नगालैंड में बीजेपी सरकार बनाती दिख रही है. Also Read - सवाल- केंद्र की राजनीति में जाने वाले हैं? 15 साल मुख्यमंत्री रहे रमन सिंह का जवाब- 'यहीं हूं मैं'

आईपीएफटी से गठबंधन
त्रिपुरा में बीजेपी ने आईपीएफटी से गठबंधन किया है जो त्रिपुरा के जनजातीय लोगों का प्रतिनिधित्व करती है. हालांकि आईपीएफटी जनजातीय लोगों के लिए त्रिपुरा से अलग राज्य की मांग करती रही है. बीजेपी आईपीएफटी के एजेंडे पर कुछ नहीं कहती है. त्रिपुरा विधानसभा में 20 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं. इन 20 सीटों में आईपीएफ़टी नौ सीटों पर और बीजेपी 11 सीटों चुनाव लड़ी है.

सत्ता विरोधी लहर
सीपीएम के खिलाफ सत्ताविरोधी रुझान देखा जा रहा है क्योंकि विकास के एजेंडे पर सीपीएम कमजोर रही है. बुनियादी ढांचे के मामले में त्रिपुरा में काम हुआ है, लेकिन जॉब क्रिएट नहीं हो पाई, चेन्नई और मुंबई के बाद त्रिपुरा आईटी गेटवे बन तो गया, लेकिन इसके बावजूद वहां आईटी इंडस्ट्री खड़ी नहीं हो पाई. ये वो मुद्दे हैं जो माणिक सरकार के खिलाफ सत्ता विरोधी रुझान को मजबूती देते हैं. माणिक सरकार जॉब क्रिएशन में नाकाम रहे. वहीं वह वेतन आयोग की सिफारिशें भी लागू नहीं कर पाए.

स्मार्ट फोन वाली पीढ़ी ने नकारा
25 साल एक लंबा वक्त होता है. 1998 से लगातार त्रिपुरा में 4 बार से सीपीएम के मुख्यमंत्री माणिक सरकार रहे हैं. त्रिपुरा की नौजवान पीढ़ी को लगता है कि माणिक सरकार को स्मार्टफोन तक इस्तेमाल करना नहीं आता और उन्होंने राज्य की आईटी की संभावनाओं को महत्व ही नहीं दिया.
त्रिपुरा में 1978 के बाद से वाम मोर्चा सिर्फ एक बार 1988-93 के दौरान सत्ता से दूर रहा था. बाकी सभी विधानसभा चुनावों में लेफ्ट का कब्जा रहा है. पिछले पांच विधानसभा चुनावों से वाममोर्चा जीतता आ रहा है.

बंगालियों ने दिया साथ!
त्रिपुरा में बांग्ला भाषा बोलने वालों की एक बड़ी आबादी है. माना जा रहा है कि इस आबादी ने बीजेपी के पक्ष में मतदान किया. इसके अलावा आदिवासी समुदाय में भी इस बार बीजेपी ने पकड़ बनाई। प्रधानमंत्री नरेंग्र मोदी और बीजेपी त्रिपुरा के लोगों को यह भरोसा दिलाने में सफल रही कि सत्ता में आने पर वह राज्य का विकास करेगी. युवाओं को नौकरी के नए मौके देगी. यहां 72 फ़ीसदी आबादी बंगालियों की है.

2013 के चुनाव में सीपीएम ने 49.58 वोट के साथ 50 सीटें जीती थी. कांग्रेस को 10 सीटें और 36.50 फीसदी वोट मिले थे. वहीं बीजेपी को 1.54 फीसदी वोट मिले थे और एक भी सीट जीत नहीं सकी थी लेकिन बीजेपी सत्ता के सिंहासन पर विराजमान होती दिख रही है.