नई दिल्ली। भारतीय रेल देश में निर्मित बहुप्रतीक्षित सेमी हाईस्पीड ट्रेन 18 का परीक्षण करने जा रहा है. ट्रेन 18 के सितंबर से शुरू होने की उम्मीद है. भारतीय रेल के तकनीकी सलाहकार अनुसंधान डिजाइन व मानक संगठन (आरडीएसओ) इसका परीक्षण करेगा और ट्रेन को मान्यता देगा. सफल ट्रायल के बाद ये ट्रेन भारतीय रेलवे के इतिहास में नया पन्ना जोड़ेगी. इस ट्रेन में अत्याधुनिक सुविधाएं होंगी. Also Read - Railways/IRCTC: यात्रीगण कृपया ध्यान दें! दीपावली-छठ पर करनी है ट्रेन से यात्रा, जान लें ये जरूरी बात...

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ट्रेन 18 से नए युग में प्रवेश Also Read - RRB NTPC Recruitment 2020: रेलवे में नौकरी करने का शानदार मौका, 35208 पदों पर निकली वैकेंसी, जल्दी करें अप्लाई

इसे ट्रेन 18 नाम इसलिए दिया गया है क्योंकि इसी साल इसका निर्माण हुआ है. इस ट्रेन के लॉन्च के साथ ही भारतीय रेलवे तकनीक के नए युग में प्रवेश करेगी क्योंकि ये पहली ऐसी ट्रेन होगी जिसमें इंजन नहीं होगा. ये ट्रेन बिल्कुल मेट्रो ट्रेन की तरह काम करेगी जिसमें दोनों तरफ ड्राइवर केबिन होते हैं. यानि इसमें इंजन को बदलने की कोई जरूरत नहीं होगी जिससे काफी समय बचेगा.

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इसका प्रोपल्सन सिस्टम इसे तेज गति प्रदान करेगा. इसका मतलब ये है कि अगर ट्रेन 18 दिल्ली से भोपाल के बीच चले तो दूसरे ट्रेन के मुकाबले काफी कम समय लेगी. इस सेमी हाईस्पीड ट्रेन की स्पीड 160 किमी प्रति घंटे होगी. ट्रेन 18 का निर्माण चेन्नई के इंटीग्रल कोच फैक्टरी (ICF) में हो रहा है और सितंबर के अंत तक इसका ट्रायल पूरा हो जाएगा.

तीन महीने तक होगा ट्रायल

ट्रेन 18 का ट्रायल तीन महीने तक होगा क्योंकि ये भारतीय रेलवे के लिए बिल्कुल ही नई तकनीक है. इसका ट्रायल मुरादाबाद रूट और एक पश्चिम रूट पर किया जाएगा. कोचों भी बेहद उन्नत किस्म के और आरामदायक होंगे. एयरकंडीशन चेयर कार ट्रेन एक्जीक्यूटिव और नॉन एक्जीक्यूटिव श्रेणी के होंगे और इनकी सीटें ज्यादा आरामदायक होंगी. इसमें ऑटोमैटिक दरवाजे, स्लाइडिंग पायदान होंगे जो प्लेटफॉर्म पर जाकर खुलेंगे. ट्रेन में व्हीलचेयर फ्रेंडली टॉयलेट, एलईडी लाइटिंग, इनफॉरमेशन स्क्रीन भी लगे होंगे. इसके अलावा इंटर-कनेक्टेड पूरी तरह से बंद गैंगवे, वाई-फाई और इंफोटेमेंट, जीपीएस आधारित यात्री सूचना प्रणाली, जैव-वैक्यूम प्रणाली, माड्यूलर शौचालय और घूमने वाली सीटें शामिल हैं.