नई दिल्ली: भाजपा की अगुवाई वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार एक फरवरी यानी शुक्रवार को अपने कार्यकाल का आखिरी बजट पेश करने जा रही है. यह अंतरिम बजट होगा. इससे पहले रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स ने आगाह किया है कि यदि वित्त मंत्री पीयूष गोयल लोकसभा चुनावों के मद्देनजर लोकलुभावन उपायों की घोषणाएं करते हैं, तो इससे सरकार अपने राजकोषीय लक्ष्य से चूक सकती है. फिच ने कहा कि अंतरिम बजट से राजकोषीय मजबूती के लिए सरकार के प्रयास का कुछ संकेत मिलेगा. स्वायत्त रेटिंग में यह एक प्रमुख कारक होता है.Also Read - Sahara Group की इन तीन कंपनियों पर लगा बैन, जनता से कोई भी पैसा जमा नहीं कर पाएंगी

फिच ने कहा कि सत्ताधारी भाजपा सरकार पर मतदाताओं को लुभाने, विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों और छोटे कारोबारियों को लुभाने के लिए नए खर्च का दबाव है. ऐसा इस वजह से है कि भाजपा अब आम चुनावों में अपनी जीत को लेकर अधिक आशान्वित नहीं है. रेटिंग एजेंसी ने कहा कि हालिया विधानसभा चुनावों में ग्रामीण इलाकों में दिक्कतों और रोजगार सृजन को लेकर चिंता की वजह से भाजपा को वोट गंवाने पड़े हैं. Also Read - केंद्र ने सरकारी अफसरों-कर्मचारियों के लिए जारी की Covid Guidelines, वर्क फ्रॉम होम समेत जानें यहां डिटेल

फिच ने कहा कि लोकलुभावन खर्च की वजह से रोजकोषीय दबाव बढ़ेगा. यह दबाव राजस्व संग्रह में कमी की वजह से पहले से बना हुआ है. फिच ने कहा कि चुनाव से पहले ऊंचे खर्च से लगातार दूसरे साल सरकार अपने राजकोषीय लक्ष्य से चूक जाएगी. इससे सरकार के राजकोषीय घाटे और कर्ज के बोझ को कम करने में और विलंब होगा. Also Read - लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र 21 साल करने के लिए मौजूदा सत्र में आ सकता है बिल: Sources

रेटिंग एजेंसी ने कहा कि स्वायत्त रेटिंग के लिए दीर्घावधि का रुख अधिक महत्वपूर्ण होता है. हालांकि, फिच का मानना है कि इन सब स्थितियों के बावजूद सरकार 2018-19 में राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 3.3 प्रतिशत पर रखने के अपने लक्ष्य को हासिल कर सकती है. यह तभी हासिल होगा जबकि पूंजीगत व्यय और बिल भुगतान को मार्च के बाद तक के लिए टाला जाए.