नई दिल्ली| मौजूदा लोकसभा के तीन साल में 545 सदस्यों में से सिर्फ पांच सांसद ही ऐसे हैं, जिनकी उपस्थिति शत-प्रतिशत रही. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अपने पुत्र राहुल गांधी की अपेक्षा सदन की ज्यादा बैठकों में हिस्सा लिया. उत्तर प्रदेश के बांदा से सांसद भैरों प्रसाद मिश्रा की उपस्थिति का रिकार्ड 100 प्रतिशत है और उन्होंने 1468 बहसों और चर्चाओं में भाग लिया, जो लोकसभा में सर्वाधिक है. लोकसभा के 22 सदस्यों ने आधे से भी कम बैठकों में भाग लिया. प्रधानमंत्री और कुछ मंत्रियों के रिकार्ड उपलब्ध नहीं हैं, क्योंकि उनके लिए उपस्थिति रजिस्टर पर हस्ताक्षर करना जरूरी नहीं है. विपक्ष के नेता को भी यह छूट प्राप्त है.

कांग्रेस अध्यक्ष कुछ समय तक अस्वस्थ थीं और उनकी उपस्थिति का प्रतिशत 59 है, जबकि राहुल गांधी का उपस्थिति प्रतिशत 54 है. पिछले तीन साल में सोनिया गांधी ने पांच चर्चाओं में भाग लिया, जबकि राहुल ने महंगाई के मुद्दे सहित 11 बहसों में भाग लिया. गैर लाभकारी शोध निकाय ‘पीआरएस लेजिस्लेटिव’ के आंकड़ों के अनुसार करीब 25 प्रतिशत सांसदों (133 सदस्य) ने 90 प्रतिशत से अधिक बैठकों में भाग लिया, जबकि सांसदों का राष्ट्रीय औसत 80 प्रतिशत है.

सदन में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और वीरप्पा मोइली ने क्रमश: 92 प्रतिशत और 91 प्रतिशत बैठकों में भाग लिया. ज्योतिरादित्य सिंधिया और राजीव सातव ने क्रमश: 80 और 81 प्रतिशत बैठकों में हिस्सा लिया. जिन चार अन्य सांसदों ने 100 प्रतिशत बैठकों में हिस्सा लिया, उनमें बीजद के कुलमणि समल के अलावा गोपाल शेट्टी, किरीट सोलंकी, रमेश चंद्र कौशिक (सभी भाजपा) शामिल हैं.

सपा नेता मुलायम सिंह यादव ने 79 प्रतिशत बैठकों में भाग लिया, वहीं उनकी पुत्रवधु डिंपल यादव उन सांसदों में शामिल हैं, जिन्होंने 50 प्रतिशत से कम बैठकों में हिस्सा लिया. डिंपल की उपस्थिति का प्रतिशत सिर्फ 35 है. पीएमपीके नेता अंबुमणि रामदास की उपस्थिति 45 प्रतिशत रही, जबकि झामुमो नेता शिबु सोरेन की उपस्थिति 31 प्रतिशत रही.

अमरिंदर सिंह दिसंबर, 2016 तक सदन के सदस्य थे और उन्होंने सिर्फ छह प्रतिशत बैठकों में भाग लिया, जबकि महबूबा मुफ्ती ने 35 प्रतिशत बैठकों में भाग लिया. महबूबा ने जनवरी 2016 में सदन की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था.

चंडीगढ़ से सांसद किरण खेर की उपस्थिति 86 प्रतिशत रही, जबकि परेश रावल की उपस्थिति का प्रतिशत 68 रही. शत्रुघ्न सिन्हा ने 70 प्रतिशत बैठकों में भाग लिया, लेकिन उन्होंने किसी चर्चा में भाग नहीं लिया और न ही कोई सवाल पूछा.