नई दिल्ली: पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी एम्स में भर्ती हैं. जहां उनकी हालत बेहद नाजुक बनी हुई है. ऐसे में आम जनता से लेकर राजनेता तक हर कोई उनके स्वस्थ्य होने की कामना कर रहा है. अटल बिहारी वाजपेयी एक ऐसे नेता थे जिन्होंने गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री के रूप में पहली बार पांच साल तक शासन चलाया, वो भी एक दर्जन से अधिक सहयोगियों को लेकर. अटल बिहारी वाजपेयी की बड़ी उपलब्धियां आर्थिक मोर्चे पर थीं. उन्होंने 1991 में पी.वी. नरसिंह राव सरकार द्वारा पेश किए गए आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाया.
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अटल के कार्यकाल के दौरान बेहतर आर्थिक सुधारों का परिणाम था कि जब 2004 में मनमोहन सिंह ने पदभार संभाला, तो उन्हें बेहतर अर्थव्यवस्था मिली. उस समय सकल घरेलू उत्पाद की दर 8 प्रतिशत से अधिक थी, जबकि महंगाई दर 4 प्रतिशत नीचे और मुद्रास्फीति भी बेहतर स्थिति में थी. अटल बिहारी वाजपेयी ने आर्थिक मोर्चे पर जो कदम उठाए, उससे न केवल बीजेपी बल्कि दूसरी पार्टियों की नजर में भी सरकार को प्रशंसा मिली. तीन बार देश के प्रधानमंत्री रहते हुए उन्होंने कई ऐसे महत्वपूर्ण कदम उठाए थे जिन्हें आज भी हर भारतीय याद करता है. 1998 में उन्होंने पोखरण परमाणु परीक्षण करवाकर दुनिया को यह संदेश दे दिया था कि अब भारत किसी से डरने वाला नहीं है. अटल ने अपने शासनकाल के दौरान कई ऐसी योजनाएं शुरू की थी जिनसे भारतीय अर्थव्यवस्था को तो मजबूती मिली ही साथ में हर भारतीय को उसका लाभ आज भी मिल रहा है. आइए एक नजर इन्हीं योजनाओं पर डालते हैं:-
1. स्वर्णिम चतुर्भुज योजना
अटल बिहारी वाजपेयी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि थी 5846 किलोमीटर की स्वर्णिम चुतर्भुज योजना. इसके तहत देश के बड़े शहरों को सड़क मार्ग से जोड़ने की शुरूआत की गई थी. इसे दुनिया के सबसे लंबे राजमार्गों में जाना जाता है, यह मुख्य रूप से राजमार्गों के एक नेटवर्क वाली योजना है जो देश के चार प्रमुख महानगरों को चार दिशाओं–दिल्ली (उत्तर), चेन्नई (दक्षिण), कोलकाता (पूर्व) और मुंबई (पश्चिम) में जोड़ता है–जिससे एक चतुर्भुज बन जाता है और इसीलिए इसका नाम स्वर्णिम चतुर्भुज है.
2. निजीकरण
अटल बिहारी वाजपेयी के शासनकाल में पहली बार विनिवेश से निजीकरण तेजी से बढ़ा. इंडियन पेट्रोकेमिकल्स कॉरपोरेश (आईपीसीएल) रिलायंस के हाथों चला गया, जबकि हिंदुस्तान जिंक का स्वामित्व वेदांता समूह के पास चला गया. इसी तरह भारतीय पर्यटन विकास निगम (आईटीडीसी) के काफी सारे होटलों का मालिकाना हक भी बदल गया. कारोबार और उद्योग चलाने में सरकारी भूमिका को कम करने के लिए ऐसा करना जरूरी था.
3. राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम
वाजपेयी सरकार ने राजकोषीय घाटे को कम करने के उद्देश्य से वित्तीय उत्तरदायित्व अधिनियम शुरू करके एक और शुरुआत की. ऐसा करके सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की बचत को बढ़ावा दिया जो वित्त वर्ष 2000 में जीडीपी के 0.8% से बढ़कर वित्त वर्ष 2005 में 2.3% हो गया.
4. दूरसंचार क्रांति
वाजपेयी सरकार की नई दूरसंचार नीति ने दूरसंचार के लिए निश्चित लाइसेंस शुल्क की जगह भारत में दूरसंचार क्रांति की शुरुआत की. उन्होंने टेलीकॉम कंपनियों के कई नीतियां और कानून तैयार किए. भारत संचार निगम लिमिटेड के लिए एक अलग पॉलिसी बनाई गई. ऐसा करके सरकार ने विदेश संचार निगम लिमिटेड के आधिपत्य को खत्म किया.
5. सर्व शिक्षा अभियान
अटल बिहारी वाजपेयी के शासनकाल में ही सर्व शिक्षा अभियान की शुरूआत हुई थी. यह भारत सरकार का एक प्रमुख कार्यक्रम है, जिसके तहत 6-14 साल के बच्चों की मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा के प्रावधान को मौलिक अधिकार बनाया गया है. इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यालयों के प्रबंधन में समुदाय की सक्रिय भागीदारी के साथ सामाजिक, क्षेत्रीय और लिंग संबंधी अंतरालों के अंतर को खत्म करना है.
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