नई दिल्लीः पिछले कई दिनों से उत्तर भारत में बारिश ने कहर बरपा रखा है. बारिश से सबसे ज्यादा प्रभाव उत्तर प्रदेश में पहुंच रहा है. राज्य के कई जिलों में जन जीवन अस्त व्यस्त हो गया है और रोज मर्रा के काम पूरी तरह से ठप हो गए हैं. प्रदेश के कई जिलो में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है. गंगा और यमुना नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है जिससे इनके किनारे बसे शहरों में जल भराव हो गया है.

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बारिश के कारण प्रयागराज में गंगा नदी पूरे उफान पर है. जलस्तर बढ़ने से शहर के निचले इलाकों में पानी भर गया है. बारिश ने किस कदर लोगों को परेशान कर रखा है इसको इसी बात से समझ सकते हैं कि कॉलोनियों में लोगों को एक स्थान से दूसरे स्थान जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है. बाढ़ से ग्रस्त इलाकों में प्रशासन राहत कार्य में जुटा हुआ है और साथ ही फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों में पहुंचाया जा रहा है.

बारिश के कारण जलस्तर इतनी तेजी से बढ़ा कि लोग जब तक बाढ़ से बचने का तरीका खोजते तब कर निचले इलाको और गांवों में पानी लबालब भर गया. हजारों मकान बाढ़ की चपेट में हैं. एक मंजिला तक पानी भरे होने के कारण लोगों को छतों और दूसरे फ्लोर पर रहना पड़ रहा है. आपको बता दें कि लगभग 50 से ज्यादा गांव बाढ़ की चपेट में हैं. जिन लोगों के घर पूरी तरह से बाढ़ में डूब गए हैं उन लोगों के लिए शहर में राहत शिवर का इंतजाम किया गया है.

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दो हफ्तो से ज्यादा समय से मध्य प्रदेश और उत्तराखंड में हो रही बारिश की वजह से गंगा का जल स्तर बढ़ गया है. प्रयागराज के साथ साथ वाराणसी में भी लोग बाढ़ से परेशान हैं. बाढ़ की वजह से घाट पूरी तरह से डूब चुके हैं इसलिए लोग पिंड दान जैसे काम सड़क किनारे ही कर रहे हैं.

जिन शहरों में बाढ़ की स्थिति है वहां पर बिजली काट दी गई है, जिससे लोगों को जन जीवन के आम कार्य करने में भी परेशानी आ रही है. प्रशासन की तरफ से निचले क्षे त्रों में रहने वाले लोगों को किसी सुरक्षित स्थान में जाने के लिए कहा है.