तिरुवनंतपुरम/बेंगलूरू/चेन्नई. केरल में कहर बरपा रही बारिश के कारण जहां अब तक आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 210 लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं पड़ोसी राज्य कर्नाटक और तमिलनाडु में भी मानसूनी वर्षा के कारण आम जनजीवन त्रस्त है. केरल में रविवार को भारी वर्षा के कारण आई बाढ़ से 10 और लोगों की जान चली गई. इधर कर्नाटक के कोडागू जिले में रविवार तक लगभग 4 हजार लोगों को बचाया गया है. कर्नाटक में वर्षा के कारण हो रहे भूस्खलन से 6 लोगों की मौत हो चुकी है. बाढ़ के ताजा हालात जानने के लिए मुख्यमंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने कल कोडागू जिले का हवाई सर्वे किया और वहां पर स्थित हरंगी डैम का जायजा लिया.

सुधर रहे हालात, एक लाख जवान, 67 हेलीकॉप्टर, 24 एयरप्लेन और 548 मोटरबोट बचाव में लगे हैं

केरल की सीमा से सटा हुआ है कोडागू
केरल सीमा से लगे कर्नाटक के कोडागू जिले में दो माह के एक शिशु समेत 317 लोगों को बचाया गया और राहत केंद्रों में भेजा गया है. मक्कनडुरू और अन्य प्रभावित क्षेत्रों के आस-पास आज बचाव अभियान जारी है. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फोन पर राज्य के मुख्यमंत्री एच. डी. कुमारस्वामी से बातचीत की और वहां के हालात के बारे में पूछताछ की. कुमारस्वामी बारिश प्रभावित इस जिले में डेरा डाले हुए हैं. मुख्यमंत्री कार्यालय ने बताया कि पीएम मोदी ने इस स्थिति का सामना करने में राज्य को पूरी सहायता देने का आश्वासन दिया. प्रधानमंत्री ने अपने ट्वीट में कहा, ‘बचाव एवं राहत अभियानों में हरसंभव मदद दी. मैं बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लोगों की सुरक्षा और खैरियत की कामना करता हूं.’ मुख्यमंत्री कार्यालय ने एक बयान में कहा कि कुमारस्वामी ने राष्ट्रपति कोविंद को सूचित किया कि जिला प्रशासन सेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर राहत एवं बचाव कार्य प्रभावी तरीके से चला रहा है. बयान के अनुसार उन्होंने राष्ट्रपति को बताया कि अब तक 3,500 से अधिक लोगों को बचा लिया गया है.

पिछले 4 दिनों से चल रहा है राहत कार्य
कर्नाटक में बाढ़ प्रभावित कोडागू जिले के सभी 31 राहत शिविरों के लिए भोजन और बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था की गई है. सशस्त्र बलों, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, नागरिक रक्षा बल, दमकल एवं आपात सेवा के तकरीबन 1000 कर्मियों को 15 अगस्त से बचाव कार्य में लगाया गया है. सीएम कुमारस्वामी ने रविवार को दूसरे दिन भी प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया. उन्होंने जिले के कुछ अन्य क्षेत्रों में भी जाकर हालात का जायजा लिया. मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार कदम उठा रही है ताकि राहत और भोज्य पदार्थ खासतौर पर सुदूर इलाकों में भी पहुंच सकें. इधर, तटीय और मलनाड क्षेत्र के कुछ जिलों और खासतौर पर चिकमंगलुरू जिले से भी बाढ़ और भूस्खलन की खबरें मिली हैं. इससे सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है.

तमिलनाडु में भी बाढ़ को लेकर अलर्ट
केरल और कर्नाटक के अलावा तमिलनाडु में तमिलनाडु में कावेरी समेत बड़ी नदियां उफान पर हैं. नदी तटों से लगे निचले इलाके जलमग्न हैं. राज्य के मदुरै और थेनी के अलावा कावेरी डेल्टा क्षेत्र समेत 13 जिलों में बाढ़ के लिए अलर्ट जारी किया गया है क्योंकि पेरियार और वैगई बांधों में भी भारी प्रवाह हुआ है. कर्नाटक से भारी प्रवाह के मद्देनजर मेट्टूर समेत बांधों से पानी छोड़े जा रहे हैं. इससे कई गांव जलमग्न हो गए हैं और कावेरी और उसकी सहायक नदी भवानी के तट पर खड़ी फसलें बाढ़ के पानी में डूब गई हैं. अधिकारियों ने बताया कि मदुरै जिले के वैगई बांध में जल स्तर 69 फुट (अधिकतम 71 फुट) तक पहुंच गया, जिससे अधिकारियों को शटर खोलना पड़ा. अधिकारियों ने बताया कि राज्य में अब तक लगभग 14,000 लोगों को विभिन्न जिलों में राहत शिविरों में भेज दिया गया है. तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के. पलानीस्वामी ने राज्य के बांधों से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने की वजह से आई बाढ़ से फसलों को हुए नुकसान के लिए आज मुआवजा देने का आश्वासन दिया और बेघर हुए लोगों को पक्के मकान देने का भरोसा दिलाया. उनके मंत्रिमंडलीय सहयोगी ओ एस मणियन, आर बी उदय कुमार और एस पी वेलुमणि ने नागपत्तनम, कन्याकुमारी जिले और कोयंबटूर जिले के वालपराई में बाढ़ प्रभावित गांवों का दौरा किया. ये क्षेत्र भारी वर्षा से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं.

केरल में बाढ़ से साढ़े 7 लाख लोग प्रभावित
दक्षिण पश्चिमी मानसून के कहर का सामना कर रहे केरल में मूसलाधार बारिश की वजह से विस्थापित लोगों की संख्या मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने 7.24 लाख बताई. उन्होंने कहा कि ज्यादातर प्रभावित लोगों को बचा लिया गया है और अब सरकार का ध्यान उनके पुनर्वास पर होगा. राज्य में 29 मई को मानसून के आगमन के बाद से कुल मिलाकर बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं में अब तक तकरीबन 400 लोगों की मौत हुई है. इससे राज्य के पर्यटन उद्योग को काफी झटका लगा है. बाढ़ में हजारों एकड़ जमीन पर खड़ी फसल तबाह हो गई है और आधारभूत संरचना को भारी क्षति पहुंची है. राज्य में ऊंचाई वाले इडुक्की, मलप्पुरम, त्रिशूर और एर्नाकुलम जिले बाढ़ से सर्वाधिक प्रभावित हैं. इसकी वजह से मुल्लापेरियार बांध और इडुक्की जलाशयों को खोला गया है, इसलिये अन्य जलाशय भी बाढ़ का अनुप्रवाह पैदा कर रहे हैं. केरल के ज्यादातर हिस्सों को रविवार को बारिश से राहत मिली. वहां पिछले तकरीबन दो हफ्ते से वस्तुत: लगातार बारिश हो रही थी. कई जिलों से रेड अलर्ट को हटा लिया गया है. पिछले दो दिनों में केरल में बारिश की तीव्रता कम हुई है. मौसम विभाग ने कहा कि अगले चार दिनों में भारी वर्षा की कोई चेतावनी नहीं है.

राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने दिया मदद का भरोसा
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने केरल के राज्यपाल पी. सदाशिवम और सीएम पिनराई विजयन से बातचीत की और वहां के हालात के बारे में पूछा तथा इस संकट की घड़ी में धैर्य और साहस दिखाने के लिये लोगों की तारीफ की. राष्ट्रपति भवन एक ट्वीट में कहा, ‘राज्य की जनता को आश्वस्त किया कि समूचा देश उनके साथ है.’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया था और 500 करोड़ रुपए की तत्काल आर्थिक सहायता देने की घोषणा की थी. समीक्षा बैठक के बाद तिरुवनंतपुरम में संवाददाताओं से बातचीत में विजयन ने कहा कि राज्य के 5645 राहत शिविरों में सात लाख 24 हजार 649 लोगों को ठहराया गया है. उन्होंने बताया कि आज तकरीबन 22000 लोगों को बचाया गया. उन्होंने अभियान में सेना, नौसेना, वायुसेना, तटरक्षक, एनडीआरएफ, मछुआरों और स्थानीय लोगों के प्रयासों की सराहना की.

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बाढ़ के बाद की स्थिति से निपटने की तैयारी
केरल के मुख्यमंत्री पी. विजयन ने कहा कि राज्य सरकार बाढ़ के बाद पैदा होने वाली स्थिति से भी निपटने की तैयारी कर रही है. उन्होंने रविवार को मीडिया के साथ बातचीत में कहा कि प्रत्येक पंचायत में छह स्वास्थ्य अधिकारी तैनात किए जाएंगे ताकि बाढ़ के पानी में कमी आने पर किसी भी संक्रामक बीमारी का प्रकोप न हो. नौसेना हवाई अड्डे से कोच्चि से वाणिज्यिक उड़ानों का परिचालन कल से कोयंबटूर और बेंगलुरु के लिए बहाल होगा. इससे यात्रियों को कुछ राहत मिलेगी. राज्य के कई हिस्सों में रेल यातायात अब भी बाधित है. रेलवे ने कम से कम 18 ट्रेनों को रद्द कर दिया है. इस बीच, कुछ क्षेत्रों में बाढ़ के पानी में गिरावट आई. राहत शिविरों में रह रहे लोगों ने धीरे-धीरे अपने घर लौटना शुरू कर दिया है. उन क्षेत्रों में बिजली और पानी की आपूर्ति बहाल करने के प्रयास चल रहे हैं जहां बिजली व्यवस्था पूरी तरह से तबाह हो गई है.