नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि यह कहना गलत है कि नरेंद्र मोदी सरकार आलोचना नहीं सुनती है. कार्पोरेट कर में कटौती से जुड़े संशोधन वाले ‘कराधान विधि (संशोधन) विधेयक 2019’ पर लोकसभा में चर्चा का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि यह सरकार आलोचना सुनती है और सकारात्मक ढंग से जवाब देती है तथा कदम भी उठाती है.

इस दौरान उन्होंने कहा, “हमें ‘सूट-बूट की सरकार’ बार-बार कहा गया. हमें बताया गया है कि कॉर्पोरेट कर कम करने से केवल अमीर को मदद मिलती है. मैं उन्हें बताना चाहती हूं कि कॉर्पोरेट कर कटौती कंपनी अधिनियम के अनुसार पंजीकृत सभी छोटे और बड़े व्यवसायों को मदद करती है.”

वित्तमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, “उज्ज्वला के तहत 8 करोड़ लोगों को गैस कनेक्शन दिए. आयुष्मान भारत के 68 लाख लाभार्थी कौन हैं? वे 11 करोड़ लोग कौन हैं जिनके घरों में शौचालय बने हैं? क्या वे किसी के ‘दामाद या जीजा हैं?’ हमारी पार्टी में जीजा नहीं हैं, हमारे पास केवल कार्यकर्ता हैं.”


इससे पहले उन्होंने एक आर्थिक समाचार पत्र के कार्यक्रम में उद्योगपति राहुल बाजाज के ‘डर का माहौल’ वाले बयान का हवाला देते हुए कहा कि उस जगह गृह मंत्री (अमित शाह) ने पूरा जवाब दिया और जब भी आलोचना होती है तो यह सरकार सुनती है और जवाब देती है.

उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया में तो कुछ लोगों ने सबसे खराब वित्त मंत्री कह दिया, लेकिन मैंने कुछ नहीं कहा. मंत्री ने कहा कि यह सरकार और प्रधानमंत्री आलोचनाओं को सुनते हैं और सकारात्मक ढंग से जवाब देते हैं. उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि सवाल पूछकर भाग जाना कुछ लोगों के डीएनए में है, लेकिन हमारी पार्टी (भाजपा) में ऐसा नहीं है. कुछ सदस्यों की आलोचना का जवाब देते हुए कहा कि वैश्विक हालात को देखते हुए कुछ तत्काल कदम उठाना था और ऐसे में यह अध्यादेश लाना पड़ा.

निर्मला ने कहा कि ऐसा पहली बार नहीं है कि जरूरत पड़ने पर अध्यादेश लाए गए हों. 1991-96 के दौरान 77 अध्यादेश और 2004-09 के दौरान 36 अध्यादेश लाए गए थे. संप्रग सरकार के समय जीडीपी आंकड़ों का हवाला देते हुए मंत्री ने कहा कि पहले भी जीडीपी नीचे गिरकर आगे बढ़ी है. कार्पोरेट कर में कटौती से वित्तीय घाटा बढ़ने के कांग्रेस के आरोप को खारिज करते हुए निर्मला ने कहा कि मोदी सरकार वित्तीय घाटे को चार फीसदी के नीचे रखने में सफल रही है.

उन्होंने कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी के दावे का जवाब देते हुए कहा कि अगर सोनिया गांधी के कहने पर सरकार ने आरसीईपी पर हस्ताक्षर नहीं किया तो फिर कांग्रेस ने 2013 में बाली समझौते पर हस्ताक्षर करते समय सोनिया गांधी की क्यों नहीं सुनी? निर्मला ने कहा कि बाली समझौते को अगर आगे बढ़ा दिया जाता तो फिर किसानों को समर्थन मूल्य नहीं मिल पाता. उन्होंने कहा कि प्रत्यक्ष कर संग्रह में पांच फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. बीएसएनल की स्थिति के लिए पूर्व की संप्रग सरकार को जिम्मेवार ठहराते हुए मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार इस कंपनी को मजबूत बनाने के लिए पूरे प्रयास कर रही है.

(इनपुट भाषा)