रांची: झारखंड उच्च न्यायालय ने चारा घोटाले के तीन विभिन्न मामलों में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र को स्वास्थ्य कारणों के आधार पर नियमित जमानत दे दी. अभी वह अस्थाई जमानत पर हैं. जगन्नाथ मिश्र के अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा ने बताया कि न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह ने कैंसर एवं अन्य बीमारियों से पीड़ित मिश्र को चारा घोटाले के सभी मामलों में नियमित जमानत दे दी है. उन्होंने न्यायालय को बताया कि मिश्र 16 फरवरी, 2018 से चारा घोटाले के तीन मामलों में अस्थाई जमानत पर हैं और दिल्ली के निकट गुड़गांव के मेदांता अस्पताल में उनका कैंसर के लिए नियमित इलाज चल रहा है. मिश्र की कीमोथेरेपी चलने के कारण उनका रांची आना संभव नहीं है. Also Read - Covid-19: प्रशांत किशोर ने शेयर किया लॉकअप में बंद मजदूरों का वीडियो, मांगा नीतीश का इस्तीफा

चाईबासा कोषागार मामले में तीन अक्तूबर, 2013 को सजा सुनाए जाने के बाद जगन्नाथ मिश्र को पहले ही झारखंड उच्च न्यायालय से नियमित जमानत मिल चुकी है. इस मामले में सीबीआई के अधिवक्ता ने कोई आपत्ति नहीं की और कहा कि उनका इलाज गुड़गांव में चल रहा है, लिहाजा मिश्र को जमानत दिये जाने से सरकार को कोई आपत्ति नहीं है. सभी पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय ने तीनों मामलों में जगन्नाथ मिश्र को नियमित जमानत दे दी. Also Read - बिहार में कुत्ते के बच्चे को लेकर दो गुटो में विवाद, कई घायल, 1 की मौत

लालू के साथ ठहराया गया था दोषी
बता दें कि राजद प्रमुख लालू प्रसाद के साथ मिश्र को इस मामले में दोषी ठहराया गया था. राज्य के तीन बार मुख्यमंत्री रहे मिश्र 24 जनवरी को अदालत में मौजूद नहीं थे. उस दिन लालू और 48 अन्य लोगों को दोषी ठहराया गया था. सीबीआई के विशेष न्यायाधीश एस एस प्रसाद ने दोनों पूर्व मुख्यमंत्रियों को 1990 की शुरूआत में चाईबासा कोषागार से 37.62 करोड़ रुपये की अवैध निकासी के सिलसिले में पांच वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी. Also Read - Coronavirus: बिहार में लॉकडाउन, गरीबों को राहत पैकेज, हर गरीब परिवार को 1 हजार रुपए मिलेंगे

चारा घोटाला में दूसरी बार दोषी
यह चारा घोटाला का दूसरा मामला है जिसमें मिश्र को दोषी ठहराया गया है. वर्ष 2013 में पहले मामले में लालू के साथ उन्हें दोषी ठहराया गया था. हालांकि पिछले वर्ष 23 दिसम्बर को राजद प्रमुख को तीसरे चारा घोटाला मामले में दोषी ठहराया गया था और मिश्र को बरी कर दिया गया था. आत्मसमर्पण के बाद मिश्र को यहां बिरसा मुंडा केन्द्रीय जेल ले जाया गया.