नई दिल्ली: करतारपुर गलियारा परियोजना (Kartarpur Corridor Project) को जल्दी पूरा करने के लिए भारत प्रतिबद्ध है और उसने पाकिस्तान से शुल्क लेने के संबंध में ‘लचीलापन’ दिखाने का भी अनुरोध किया है क्योंकि तीर्थयात्रियों के लिए यह भावनात्मक मुद्दा है. एक प्रश्न के उत्तर में शुक्रवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि भारत को आशा है कि उसकी ओर की ढांचागत परियोजना तय समय में पूरी हो जाएगी.

उन्होंने कहा, ‘‘चार लेन का राजमार्ग बनकर तैयार है और आधुनिक यात्री टर्मिनल अक्टूबर के अंत तक तैयार हो जाएगा.’’ कुमार ने कहा कि भारत ने पाकिस्तान के साथ एक समझौता साझा किया है लेकिन उसे अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है. उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘हमने उनसे लचीलापन दिखाने को कहा क्योंकि यह भावनात्मक मामला है लेकिन वह शुल्क लगाने पर जोर दे रहे हैं. हमें इसपर अभी तक जवाब नहीं मिला है. लेकिन जल्दी ही जवाब मिलने की आशा है.’’

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करतारपुर गलियारा पाकिस्तान के करतारपुर स्थित दरबार साहिब को पंजाब के गुरुदास जिले में स्थित डेरा बाबा नानक साहिब से जोड़ेगा. इस रास्ते यात्रा करने वालों को वीजा की जरुरत नहीं होगी, उन्हें सिर्फ एक परमिट लेनी होगी. भारत ने पाकिस्तान से अनुरोध किया है कि वह प्रति तीर्थयात्री 20 डॉलर शुल्क लेने के फैसले पर फिर से विचार करे. विशेष अवसरों पर 10,000 तीर्थयात्रियों और उनके जत्थे के साथ एक भारतीय प्रोटोकॉल अधिकारी को रोजाना जाने की अनुमति दे. पहले जत्थे के साथ करतारपुर जाने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की हामी के संबंध में सवाल करने पर कुमार ने कहा कि भारत की ओर आयोजित होने वाले उद्घाटन समारोह में विदेश मंत्रालय की भूमिका बेहद सीमित है.

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