नई दिल्ली: विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने सोमवार को कहा कि भारत कूटनीतिक और सैन्य स्तर के माध्यमों से चीन से बात कर रहा है और यदि उस देश के साथ कोई वार्ता नहीं होती तो भारत-चीन सीमा पर स्थिति काफी खराब होती. उन्होंने भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान द्वारा आयोजित एक वेबिनार में कोविड-19 महामारी के दौरान कूटनीति के बारे में विचार व्यक्त करते हुए यह टिप्पणी की. Also Read - ICC Board Meeting : भारत में ही होगा 2021 का T20 वर्ल्ड कप, एक साल के लिए टला महिला विश्व कप

श्रृंगला ने कहा कि कूटनीति इस बारे में अत्यंत बदले हुए परिदृश्य में है कि महामारी के मद्देनजर देशों के बीच शासन कला और संबंध किस तरह काम करते हैं. उन्होंने कहा, ‘‘देशों को आपस में बात करने की आवश्यकता है. आप बातचीत नहीं रोक सकते क्योंकि फिर दूसरा विकल्प बड़े टकराव, तनाव और समस्याओं का है, और संभवत: संघर्ष का भी.’’ Also Read - आर्मी चीफ ने कमांडरों से कहा-किसी भी स्थिति के लिए तैयार रहें, IAF ने उड़ाए चिनूक-अपाचे

विदेश सचिव ने कहा, ‘‘उदाहरण के लिए चीन से लगती हमारी सीमा पर बढ़ा हुआ तनाव. मेरा मानना है कि यदि कोई संपर्क नहीं होता तो हमारे सामने एक काफी खबराब स्थिति होती, लेकिन कल हमारे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (अजीत डोभाल) ने अपने समकक्ष से बात की. इससे पहले, हमारे विदेश मंत्री (एस जयशंकर) ने चीन के विदेश मंत्री से बात की थी.’’ उन्होंने कहा कि अन्य कूटनीतिक और सैन्य स्तर के माध्यम हैं जिनके जरिए भारत बात कर रहा है. Also Read - COVID-19 वैक्सीन अपडेट: भारत व अन्य देशों के लिए Covid-19 टीके की दस करोड़ खुराक का उत्पादन करेगा सीरम इंस्टीट्यूट, 225 रुपये होगी कीमत

श्रृंगला ने ‘आत्म निर्भर भारत की अवधारणा को लागू करना’ विषय पर आयोजित वेबिनार में कहा, ‘‘इसलिए हम उनसे बात कर रहे हैं और यदि आप बात करना बंद कर देते हैं तो आप कल्पना कर सकते हैं कि परिणाम (क्या होते). इसलिए कूटनीति ने इस नयी स्थिति के प्रति अनुकूलन किया है और वह भी डिजिटल.’’ भारत और चीन की सेनाओं के बीच पूर्वी लद्दाख में कई जगहों पर पिछले आठ सप्ताह से जारी तनातनी के बीच उनकी यह टिप्पणी आई है.

श्रृंगला ने कहा कि यद्यपि विश्व के कुछ नेता अब भौतिक बैठकें करने लगे हैं, लेकिन डिजिटल बैठकें कूटनीतिक वार्ता का प्रभावी माध्यम बन चुकी हैं और कोविड-19 का कोई प्रभावी टीका आने तक ये डिजिटल बैठकें जारी रहेंगे. उन्होंने कहा, ‘‘भारत इस तरह की डिजिटल कूटनीति के अग्रिम मोर्चे पर रहा है. मैंने उल्लेख किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डिजिटल मंचों का इस्तेमाल कर वैश्विक वार्ताएं शुरू करने के लिए किस तरह चुनौती को अवसर में बदल दिया है.’’ विदेश सचिव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने पहली बार इस माध्यम से ऑस्ट्रेलियाई प्रधाानमंत्री के साथ एक शिखर सम्मेलन भी किया. वह इस अवधि में 60 से अधिक देशों के अपने समकक्षों से भी बात कर चुके हैं.

उन्होंने कहा कि विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी अपनी तरफ से 76 देशों के विदेश मंत्रियों से बात की है. वह ब्रिक्स, एससीओ, आरआईसी समूहों की बैठकों में भी शामिल हुए हैं. इसके अलावा उन्होंने अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान, ब्राजील और दक्षिण कोरिया के अपने समकक्षों के साथ भी संयुक्त बैठकें की हैं. विदेश सचिव ने कहा कि उन्होंने खुद भी अपने कई समकक्षों के साथ डिजिटल बैठकें की हैं.

उन्होंने कहा कि डिजिटल कूटनीति का एक और उदाहरण यह है कि भारत में विभिन्न देशों के राजदूत अपने दस्तावेज डिजिटल स्वरूप में जमा कर रहे हैं. विदेश सचिव ने ‘आत्म निर्भर भारत’ विषय पर भी अपने विचार व्यक्त किए.