नई दिल्‍ली: सातवों वेतन आयोग लंबे समय से चर्चा में बना हुआ है. केंद्र सरकार के कर्मचारी जहां वेतन में और इजाफे की मांग कर रहे हैं तो राज्‍य सरकारों के कर्मी खुद को नई व्‍यवस्‍था में शामिल करने की मांग कर रहे हैं. प्राइवेट सेक्‍टर का स्‍टाफ दूर से ही इन पर नजर रख रहा है. उसे इसके साथ अपने वेतन में इजाफे की भी चिंता है. इस साल अप्रेजल की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, इसलिए तत्‍काल वेतन में वृद्धि की कोई उम्‍मीद नहीं दिखती. हालांकि, एक सर्वे हे जो अगले साल के लिए अच्‍छी उम्‍मीदें बंधा रही है.

इस सर्वे के अनुसार साल 2019 में देश में सैलरी में 10 प्रतशित तक इजाफे की उम्‍मीद है. यह एशिया पैसिफिक क्षेत्र में सबसे ज्‍यादा है. रिपोर्ट में बताया गया है कि 2018 में भी वेतन में इतना ही इजाफा हुआ था. इसके बावजूद इस साल दूसरे देशों के मुकाबले सैलरी इंक्रीमेंट ज्‍यादा हो सकता है. इसके लिए आर्थिक विकास की लगातार अच्‍छी रफ्तार, आर्थिक सुधार और अलग-अलग क्षेत्रों में संभावनाओं को इसका कारण बताया गया है.

वैश्विक एडवाइजरी, ब्रोकिंग और सॉल्‍यूशंस कंपनी विल्‍स टावर्स वॉट्सन ने 2018 के तीसरे क्‍वार्टर की सैलरी बजट प्‍लानिंग रिपोर्ट में बताया गया है कि 2019 में फार्मास्‍युटिकल सेक्‍टर में सैलरी इंक्रीमेंट सबसे ज्‍यादा रहने की उम्‍मीद है. फार्मा सेक्‍टर में 10.3 प्रतशित तक इंक्रीमेंट मिल सकता है. कंज्‍यूमर प्रोडक्‍ट्स और रिटेल सेक्‍टर में इंक्रीमेंट 10 प्रतिशत के स्‍तर पर बना रहेगा. इसकी वजह यह है कि इन दोनों सेक्‍टर्स में सुधार के लक्षण दिख रहे हैं, कंज्‍यूम्‍र का विष्‍वास बढ़ा है और लोगों की क्रय शक्ति में भी वृद्धि हुई है.

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रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि फाइनेंशियल सर्विसेस सेक्‍टर में 2017 में 9.1 प्रतशित इंक्रीमेंट हुआ था. 2019 में यह आंकड़ा बढ़कर 9.6 प्रतिशत हो सकता है. भारत में केपीओ, बीपीओ और मैन्‍युफैक्‍चरिंग का काम करने वाली मल्‍टीनेशनल कंपनियों में भी 10 प्रतिशत तक सैलरी इंक्रीमेंट हो सकता है. डॉलर की तुलना में यह राशि ज्‍यादा नहीं है और इससे इन कंपनियों के ऑपरेशनल कॉस्‍ट पर भी खास असर नहीं पड़ेगा. देसी कंपनियों में इंक्रीमेंट कम रहने का अनुमान है.

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रिपोर्ट के अनुसार कुल सैलरी इंक्रीमेंट का 42.6 प्रतिशत सर्वश्रेष्‍ठ और औसत से बेहतर प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों को मिलेगा. एग्‍जीक्‍यूटिव लेवल पर सैलरी में औसत वृद्धि 9.8 प्रतिशत तक रह सकता है. 2018 में यह 9.7 प्रतिशत था. मिड मैनेजमेंट लेवल और प्रोडक्‍शन अथवा मैनुअल लेबर के लिए ओसत वृद्धि 10 फीसदी रहने का अनुमान है. यह पिछले साल के मुकाबले थोड़ा कम है.

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रिपोर्ट में ऐसे स्किल्‍स की भी पहचान की गयी है जो अगले 12 महीनों में रिक्रूटमेंट के लिहाज से सबसे अच्‍छे हो सकते हैं. शीर्ष चार स्किल्‍स में टेक्निकली स्किल्‍ड ट्रेड (48 फीसदी), इंजीनियरिंग (45 फीसदी), आईटी (39 फीसदी) और मैनेजमेंट (15 फीसदी) को जगह दी गई है.