नई दिल्‍ली: दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का अंतिम संस्‍कार रविवार को राजधानी के निगमबोध घाट पर दोपहर बाद पूरे राजकीय सम्‍मान के साथ कर दिया गया. इससे पहले उनकी पार्थ‍िव देह कांग्रेस मुख्‍यालय लाया गया. उनके पार्थिव शरीर को जब निजामुद्दीन स्थित उनके आवास से पार्टी मुख्यालय लाया गया तो उनकी आखिरी झलक पाने के लिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच धक्का मुक्की होने लगी. कांच के ताबूत में उनका पार्थिव शरीर लेकर आ रहा ट्रक सड़क पर धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था, क्योंकि सड़क समर्थकों से भरी पड़ी थी जो ‘जब तक सूरज चांद रहेगा शीला जी का नाम रहेगा’ के नारे लगा रहे थे.

सोनिया, आडवाणी, सुषमा समेत कई नेताओं ने अंतिम दर्शन कर शीला दीक्ष‍ित को दी श्रद्धांजलि

पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को श्रद्धांजलि देने के लिए सैकड़ों लोग उमड़ पड़े. जब उनके शरीर अग्‍नि दी गई, तब अंतिम संस्‍कार में बीजेपी अध्‍यक्ष और गृह मंत्री अमित शाह व यूपीए अध्‍यक्ष सोनिया गांधी समेत कई बड़े नेता शामिल हुए.

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कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, अहमद पटेल और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत तथा कमलनाथ समेत कई शीर्ष कांग्रेस नेताओं ने कांग्रेस कार्यालय में दीक्षित को श्रद्धांजलि दी. इससे पहले भाजपा के वरिष्ठ नेता एल के आडवाणी और पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, दीक्षित के आवास पर पहुंचे और उन्हें श्रद्धांजलि दी. बता दें कि दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष शीला का शनिवार को दिल का दौरा पड़ने से शाम को 3:55 बजे निधन हो गया. वह 81 साल की थीं. अब तक हजारों लोगों ने श्रद्धांजलि दी है.

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जीत का सिलसिला तीन विधानसभा चुनावों तक जारी रहा
पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के पार्थिव शरीर को आखिरी बार दिल्ली प्रदेश कांग्रेस समिति (डीपीसीसी) के दफ्तर भी ले जाया गया. यह कार्यालय 1998 से उनकी राजनीति के केंद्र में रहा है. उनके के पार्थिव शरीर को आखिरी बार दिल्ली प्रदेश कांग्रेस समिति (डीपीसीसी) के दफ्तर ले जाया गया. यह कार्यालय 1998 से उनकी राजनीति के केंद्र में रहा है. दीक्षित ने 1998 में भाजपा के खिलाफ डीपीसीसी की अगुवाई की थी और अपनी पार्टी को जीत दिलाई थी. उनकी जीत का सिलसिला 1998 से लगातार तीन विधानसभा चुनावों (2003 और 2008) तक जारी रहा और वह 2013 तक मुख्यमंत्री पद पर रहीं, लेकिन उन्हें 2013 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के हाथों शिकस्त का सामना करना पड़ा.

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2019 के चुनाव से पहले दीक्षित को प्रदेश कांग्रेस की कमान सौंपी गई
शीला मुख्यमंत्री रहने के दौरान प्रदेश कांग्रेस प्रमुख बदलते रहे, लेकिन डीपीसीसी दीक्षित का पर्याय बन गया, क्योंकि संगठन के मामलों में उनकी काफी चलती थी. साल 2013 के बाद से कांग्रेस दिल्ली के सभी अहम चुनावों में तीसरे स्थान पर पहुंच गई. बहरहाल, 2019 के चुनाव से पहले दीक्षित को प्रदेश कांग्रेस की कमान सौंपी गई और कांग्रेस ने आप को पछाड़ कर दूसरा स्थान हासिल किया. दिल्ली में कांग्रेस सात में से पांच लोकसभा सीटों पर दूसरे स्थान पर रही.  (इनपुट- एजेंसी)

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