नई दिल्ली: भाजपा की कद्दावर नेताओं में से एक, पार्टी की प्रखर वक्ता सुषमा स्वराज के निधन पर आज पूरा देश दुखी और स्तब्ध है. पार्टी में रहते हुए अपनी सशक्त पहचान बनाने वाली सुषमा स्वराज का राजनीतिक जीवन इमरजेंसी के दौरान परवान चढ़ना शुरू हुआ था. सुषमा और उनके पति स्वराज कौशल इमरजेंसी के दिनों में जनता पार्टी के लिए सक्रिय थे. तब के सरकार विरोधी हालात में सुषमा स्वराज इमरजेंसी के सेनानियों को, जो तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार की ज्यादतियों के शिकार हुए थे, मुफ्त में कानूनी सेवा प्रदान करती थीं.

जनता पार्टी में रहते हुए उनकी जनसेवा की भावना को देखते हुए ही जब 1977 में इमरजेंसी के समाप्त होने के बाद देश में आम चुनावों की घोषणा हुई, तो हरियाणा में भी विधानसभा चुनाव कराए गए. इसमें सुषमा स्वराज अपने गृहक्षेत्र अंबाला कैंट से बतौर जनता पार्टी की उम्मीदवार चुनाव लड़ीं. चुनाव के दौरान उनके पति स्वराज कौशल ने उनके प्रचार अभियान की कमान संभाली. इस चुनाव में सुषमा स्वराज को सत्ता विरोधी लहर का लाभ मिला और उन्होंने भारी मतों से जीत दर्ज की. चुनावी जीत का इनाम उन्हें हरियाणा सरकार में मंत्री बनने के रूप में मिला. सुषमा स्वराज महज 25 साल की उम्र में कैबिनेट मंत्री बनीं. आज तक भारतीय राजनीति में यह रिकॉर्ड कायम है.

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एक सामान्य मध्यमवर्गीय परिवार में जन्म लेने वाली सुषमा स्वराज ने बाद का सफर अपनी ओजपूर्ण भाषणशैली और प्रखर राजनीतिज्ञ के रूप में तय किया. भाजपा के दिग्गज नेताओं- अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी के साथ राजनीति का ककहरा सीखने वाली इस नेता के निधन से दिल्ली भी आज गमगीन होगी. क्योंकि एक महीने के भीतर पहले शीला दीक्षित और फिर सुषमा स्वराज के रूप में इस केंद्र शासित प्रदेश ने अपना दूसरा मुख्यमंत्री खोया है. सुषमा का जन्म 14 फरवरी 1953 को हुआ था. वह सुप्रीम कोर्ट की पूर्व वकील भी थीं. पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बाद सुषमा स्वराज दूसरी महिला थीं, जिन्होंने विदेश मंत्रालय संभाला था.