नई दिल्ली: शताब्दी ट्रेनों की जगह लेने जा रही रेलवे की सेमी-हाई स्पीड ‘ट्रेन 18’ को रेल मंत्री पीयूष गोयल द्वारा ‘वंदे भारत एक्सप्रेस’ नाम दिए जाने के बाद चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (आईसीएफ) के पूर्व महाप्रबंधक (जीएम) ने कहा है कि यह ट्रेन हमेशा ही अपने मूल नाम से जानी जाएगी. उल्लेखनीय है कि आईसीएफ के पूर्व जीएम सुधांशु मणि ने उस टीम का नेतृत्व किया था, जिसने यह ट्रेन बनाई थी.Also Read - Vande Bharat Turns Vegetarian: माता वैष्णो देवी जाने वाली वंदेभारत एक्सप्रेस, होंगी शुद्ध शाकाहारी | Watch Video

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पीएम ने खुद किया था नामकरण Also Read - पीयूष गोयल ने किया ईपीसी को अगले साल 450-500 अरब डॉलर के निर्यात का लक्ष्य रखने आह्वान

इस ट्रेन के मेड इन इंडिया होने को स्वीकार करते हुए भारतीय रेल ने रविवार को इस स्वदेश निर्मित सेमी हाई स्पीड ट्रेन 18 को ‘वंदे भारत एक्सप्रेस’ के रूप में नया नाम दिया. रेल मंत्री पीयूष गोयल ने रविवार को कहा कि यह ट्रेन नयी दिल्ली से वाराणसी के बीच चलेगी. यह ट्रेन पूर्ण रूप से वातानुकूलित है, इसमें 18 डिब्बे होंगे, आईसीएफ में 97 करोड़ रुपये की लागत से 18 महीने में यह बनाई गई है.

चेन्नई स्थित आईसीएफ के पूर्व महाप्रबंधक ने ट्वीट किया, ‘‘खुशी है कि प्रथम ट्रेन 18 सेवा, दिल्ली – वाराणसी, को वंदे भारत एक्सप्रेस नाम दिया गया है. ट्रेन 18/ टी 18 नाम का इस्तेमाल प्रधानमंत्री ने खुद किया था, यह आईसीएफ के मौलिक प्रतीक के रूप में सदा बना रहेगा’’ उन्होंने कहा कि यह कहना गलत होगा कि ट्रेन का नाम बदल दिया गया और इस तरह की खबरें दुष्प्रचार हैं.

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