बेंगलुरू: केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लिंगायत और वीरशैव-लिंगायत समुदाय को धार्मिक अल्पसंख्यक का दर्जा देने की केंद्र को सिफारिश करने के लिए मंगलवार को कर्नाटक के सिद्धरमैया सरकार की आलोचना की. उन्‍होंने कहा है कि यह फैसला हिंदुओं को बांटने के लिए किया गया है. उन्‍होंने आरोप लगाया कि सिद्धरमैया सरकार ने यह कदम अपने राजनीतिक स्‍वार्थों की पूर्ति के लिए उठाया है. सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश एन संतोष हेगड़े ने भी आज इस मुद्दे पर कर्नाटक सरकार पर तीखे हमले किए. उन्होंने कहा कि किसी समुदाय को धर्म का दर्जा देने का काम सरकार का नहीं है.Also Read - केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल को हुआ कोरोना, दूसरी रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद AIIMS में भर्ती

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मेघवाल ने सिद्धरमैया सरकार पर लिंगायत समुदाय को लेकर यूपीए की मनमोहन सिंह सरकार के फैसले के खिलाफ जाने का आरोप भी लगाया है. उन्‍होंने कहा कि बीजेपी नेता बी येदियुरप्‍पा लिंगायत समुदाय से आते हैं. कांग्रेस सरकार उन्‍हें विधानसभा चुनावों के बाद मुख्‍यमंत्री नहीं बनने देना चाहती. उन्‍हें रोकने के लिए वोट बांटने की रणनीति है. समाज को विभाजित करने की कोशिश है. इसका सबसे ज्‍यादा नुकसान समाज के कमजोर तबकों को होगा. Also Read - बीजेपी में प्रदेश अध्यक्षों को लेकर हो रहा फेरबदल, कुछ पुराने चेहरे को मिल सकता है दोबारा मौका

वहीं, सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक लेख में कर्नाटक के पूर्व लोकायुक्त ने सिद्धरमैया से जानना चाहा, ‘‘ कब वह खुद को सिद्ध और रमैया में बांटेंगे.’’ उन्होंने मुख्यमंत्री से एक सवाल में कहा, ‘‘ सर, मैं कोई नेता नहीं हूं. मेरी इस बात में दिलचस्पी नहीं है कि कौन अगला चुनाव जीतेगा, लेकिन सर हम साधारण लोगों को बांटने की राजनीति कहां रुकेगी.’’

हेगड़े ने यह भी सवाल किया कि क्या वह दिगंबर या श्वेतांबर को पिछड़ा के तौर पर मान्यता देंगे, क्या वह शिया या सुन्नी में से किसी को पिछड़े का दर्जा देने के लिये अलग धर्म के तौर पर मान्यता देंगे, क्या वह पिछड़े का दर्जा देने के लिये प्रोटेस्टैंट या रोमन कैथोलिक को अलग धर्म के तौर पर मान्यता देंगे. उन्होंने कहा, ‘‘बूंट या नादव को अलग धर्म के तौर पर मान्यता देंगे और उनमें से कौन अधिक पिछड़ा होगा और ब्राह्मणों में से कौन वैष्णव या शैव होगा या क्या आप सिद्धरमैया को सिद्ध और रमैया में बांटेंगे.’’

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हेगड़े ने कहा कि अगर समुदाय खुद को बांटना चाहें तो वह सहमत होंगे, लेकिन सरकार का किसी समुदाय को धर्म के तौर पर मान्यता देने का कोई काम नहीं है. हेगड़े ने कहा, ‘‘ हमारे यहां भारत के संविधान के तहत एक सरकार, धर्मनिरपेक्ष सरकार है. किसी भी राजनैतिक दल, किसी सरकार का किसी समुदाय के आंतरिक मामले में हस्तक्षेप करने का कोई काम नहीं है.’’ सिद्धरमैया पर व्यंग्यात्मक टिप्पणी में हेगड़े ने जानना चाहा कि क्या मुख्यमंत्री पति और पत्नी के बीच हस्तक्षेप कर सकता है.

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बता दें कि कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार ने सोमवार को कैबिनेट की बैठक में लिंगायत समुदाय को अलग धर्म का दर्जा देने के सुझाव को मंजूरी दी थी. सिद्धरमैया सरकार ने जस्टिस नागमोहन दास की रिपोर्ट को मंजूरी देते हुए लिंगायत धर्म बनाने की सिफारिश की थी. बीजेपी कर्नाटक सरकार के इस फैसले का विरोध कर रही है.