
Md. Raja Alam
नमस्कार, मैं मो राजा आलम हूं और वर्तमान में India.Com हिंदी (Zee Media Group) में सब एडिटर के पद पर कार्यरत हूं. हिंदी पत्रकारिता में अपने अब तक के दो वर्षों ... और पढ़ें
Former Naxalite women Story: सुशीला और जयमती, दो महिलाएं जो कभी नक्सली काडर का हिस्सा थीं, अब देश की सेवा कर रही हैं. सुशीला उड़ीसा के मलकानगिरी और जयमती छत्तीसगढ़ के बीजापुर इलाके में सक्रिय थीं. दोनों 15 साल की उम्र में नक्सलियों के प्रभाव में आईं और उनकी गतिविधियों का हिस्सा बन गईं. यह उनके हालात का नतीजा था, जहां नक्सलियों ने उनके परिवार और गांव को प्रभावित कर उन्हें अपने संगठन में शामिल होने पर मजबूर किया.
जयमती पर 5 लाख और सुशीला पर 10 लाख का इनाम था. सुशीला ने नक्सली गतिविधियों से परेशान होकर कुछ साल पहले सरेंडर कर दिया, जबकि जयमती 2016 तक हिंसक गतिविधियों में लिप्त रहीं और बाद में गिरफ्तार हुईं. इसके बाद उनकी जिंदगी ने नया मोड़ लिया. आत्मसमर्पण के बाद इन दोनों को छत्तीसगढ़ पुलिस के डीआरजी (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड) का हिस्सा बनाया गया, जो नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन में सक्रिय है.
सुशीला और जयमती ने बताया कि नक्सलियों ने उनकी जिंदगी को कैद कर दिया था. गांव से बाहर निकलने तक की आजादी नहीं थी, और नक्सली गतिविधियों में शामिल होना उनकी मजबूरी बन गया. लेकिन मुख्यधारा में शामिल होने के बाद, वे अब अपने परिवार का भरण-पोषण करने के साथ देश की सेवा में योगदान दे रही हैं.
अपर कलेक्टर ऋषिकेश तिवारी ने बताया कि सरेंडर करने वाले नक्सलियों के लिए कई सरकारी योजनाएं और विकास कार्यक्रम शुरू किए गए हैं. इनसे न केवल उन्हें रोजगार मिला बल्कि युवाओं को भी नक्सलियों के कुचक्र से बचाने की कोशिश की जा रही है. सुशीला और जयमती अब न केवल अपने नए जीवन से संतुष्ट हैं, बल्कि नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं. यह कहानी दिखाती है कि कैसे सही मार्गदर्शन और समर्थन से जीवन की दिशा बदली जा सकती है.
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