नई दिल्ली: चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर के घटकर पांच प्रतिशत पर आने के बीच पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधा है. मनमोहन ने कहा कि मोदी सरकार बदले की राजनीति करने के बजाय सुधी लोगों के सुझावों पर ध्यान दे और अर्थव्यवस्था को गंभीर सुस्ती से उबारने का प्रयास करे.

पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि आर्थिक हालात गंभीर रूप से चिंताजनक हैं और पहली तिमाही में 5 फीसदी की जीडीपी वृद्धि दर दर्शाती है कि हम लंबे समय तक बने रहने वाली आर्थिक नरमी के दौर में हैं. उन्होंने ने कहा,‘‘मैं सरकार से अपील करता हूं कि वह प्रतिशोध की राजनीत को त्याग कर मानव निर्मित संकट से अर्थव्यवस्था को निकालने के लिए सुधी जनों की आवाज सुने.’’ मनमोहन ने कहा कि मोदी सरकार की नीतियों के परिणामस्वरूप व्यापक पैमाने पर रोजगार विहीन विकास हो रहा है. भारतीय अर्थव्यवस्था में तेजी से बढ़ने की क्षमता है लेकिन मोदी सरकार के कुप्रबंधन से हम आर्थिक सुस्ती के दौर से गुजर रहे हैं.

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बता दें कि साल की पहली तिमाही में जीडीपी में बड़ी गिरावट हुई. 5. 8 से विकास दर 5 फीसदी पर पहुंच गई. मोदी सरकार इससे निपटने की कोशिश कर रही है. वहीं, विपक्ष इसे बड़ा संकट और मोदी सरकार की गलत नीतियों का नतीजा बता रही है. देश की आर्थिक वृद्धि दर 2019-20 की अप्रैल-जून तिमाही में घटकर पांच प्रतिशत रह गयी. यह पिछले छह साल से अधिक अवधि का न्यूनतम स्तर है. विनिर्माण क्षेत्र में गिरावट और कृषि उत्पादन की सुस्ती से जीडीपी वृद्धि में यह गिरावट आई है. शुक्रवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है. इससे पहले वित्त वर्ष 2012-13 की जनवरी से मार्च अवधि में देश की आर्थिक वृद्धि दर सबसे निचले स्तर 4.9 प्रतिशत पर रही थी. एक साल पहले 2018-19 की पहली तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर आठ प्रतिशत के उच्च स्तर पर थी. जबकि इससे पिछली तिमाही यानी जनवरी से मार्च 2019 में वृद्धि दर 5.8 प्रतिशत रही थी.