नहीं रहे भारतीय राजनीति के पुरोधा अटल बिहारी वाजपेयी, शोक में डूबा देश

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का 93 साल की उम्र में निधन हो गया.

Published date india.com Updated: August 16, 2018 6:50 PM IST
नहीं रहे भारतीय राजनीति के पुरोधा अटल बिहारी वाजपेयी, शोक में डूबा देश

नई दिल्ली: पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का 93 साल की उम्र में एम्स में निधन हो गया. एम्स की ओर से मेडिकल बुलेटिन जारी कर इसकी जानकारी दी गई. वह करीब दो महीने से एम्स में भर्ती थे. बुधवार को उनकी हालत और बिगड़ गई थी और उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया था. इसके बाद से ही पीएम, मंत्रियों, नेताओं का उनसे मिलने का सिलसिला जारी हो गया था. आज शाम साढ़े 5 बजे एम्स की ओर से जारी बयान में उनके निधन की पुष्टि कर दी. उनका निधन शाम 5.05 बजे हुआ. उनके निधन के बाद बीजेपी मुख्यालय पर पार्टी का झंडा झुका दिया गया.

उन्हें गुर्दे में संक्रमण, मूत्र नली में संक्रमण, पेशाब की मात्रा कम होने और सीने में जकड़न की शिकायत के बाद 11 जून को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, दिल्ली (एम्स) में भर्ती कराया गया था. मधुमेह से ग्रस्त वाजपेयी की एक ही किडनी काम कर रही थी. साल 2009 में उन्हें आघात आया था, जिसके बाद उन्हें लोगों को पहचानने सहित कई तरह की समस्याएं होने लगीं. बाद में उन्हें डिमेशिया की दिक्कत हो गई थी. बुधवार को उनकी हालत बिगड़ गई. इसके बाद उन्हें जीवन रक्षक प्रणाली पर रखा गया था. निमोनिया के कारण उनके दोनों फेफड़े सही से काम नहीं कर रहे हैं और किडनी भी कमजोर हो गई थी. 9 हफ्ते से वह एम्स में भर्ती थे.

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी लेने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज एम्स पहुंचे. पिछले करीब 24 घंटे में मोदी दूसरी बार एम्स गए हैं. प्रधानमंत्री मोदी आज करीब 45 मिनट एम्स में रूके और डाक्टरों से वाजपेयी के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली. वे कल शाम को भी एम्स गए थे. अटल जी के निधन पर पीएम नरेंद्र मोदी सहित तमाम नेताओं ने शोक जताया है. पीएम ने ट्वीट कर कहा-

तीन बार रहे पीएम
अटल बीजेपी की तरफ से पहले प्रधानमंत्री थे. वाजपेयी तीन बार प्रधानमंत्री बने. पहली बार 13 दिन के लिए 1996 में, दूसरी बार 1998 से 1999 तक 13 महीने के लिए और तीसरी बार 1999 से 2004 तक पीएम रहे.वाजपेयी को एक लेखक के तौर पर भी जाना जाता है. 25 दिसंबर के दिन उनके जन्मदिन को बीजेपी गुड गवर्नेंस के तौर पर मनाती है. 2015 में अटल बिहारी वाजयेपी को भारत का सबसे बड़ा सिविलियन सम्मान भारत रत्न दिया गया था.

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शिखर पुरुष के रूप में पहचान
भारत के राजनीतिक इतिहास में अटल बिहारी बाजपेयी का संपूर्ण व्यक्तित्व शिखर पुरुष के रूप में दर्ज है. उनकी पहचान एक कुशल राजनीतिज्ञ, प्रशासक, भाषाविद, कवि, पत्रकार व लेखक के रूप में है. राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की विचारधारा में पले-बढ़े अटल जी राजनीति में उदारवाद और समता एवं समानता के समर्थक माने जाते हैं. उन्होंने राजनीति को दलगत और स्वार्थ की वैचारिकता से अलग हट कर अपनाया और उसको जिया.जीवन में आने वाली हर विषम परिस्थितियों और चुनौतियों को स्वीकार किया. नीतिगत सिद्धांत और वैचारिकता का कभी कत्ल नहीं होने दिया.

विरोधी भी कायल रहे
राजनीतिक जीवन के उतार चढ़ाव में उन्होंने आलोचनाओं के बाद भी अपने को संयमित रखा. राजनीति में धुर विरोधी भी उनकी विचारधारा और कार्यशैली के कायल रहे. पोखरण जैसा आणविक परीक्षण कर दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका के साथ दूसरे मुल्कों को भारत की शक्ति का अहसास कराया.

यूपी से रिश्ता
अटल बिहारी बाजपेयी का जन्म मध्य प्रदेश के ग्वालियर में 25 दिसम्बर 1924 को हुआ था. उनके पिता कृष्ण बिहारी बाजपेयी शिक्षक थे. उनकी माता कृष्णा जी थीं. मूलत: उनका संबंध उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के बटेश्वर गांव से है लेकिन, पिता जी मध्य प्रदेश में शिक्षक थे. इसलिए उनका जन्म वहीं हुआ. लेकिन, उत्तर प्रदेश से उनका राजनीतिक लगाव सबसे अधिक रहा. प्रदेश की राजधानी लखनऊ से वे सांसद रहे थे.

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