नई दिल्ली. देश की आजादी के बाद भाषा और क्षेत्रफल के आधार पर राज्यों का बंटवारा किया गया. लेकिन यह तात्कालिक कवायद थी. वर्ष 1956 में राज्य पुनर्गठन आयोग की स्थापना के बाद औपचारिक रूप से विभिन्न राज्यों का अस्तित्व सामने आया. कुछ राज्यों का पुनर्गठन भाषा के आधार पर किया गया तो वहीं कई राज्य भौगोलिक आधार पर अस्तित्व में आए. बाद के दिनों में इन राज्यों में भी कई का बंटवारा हुआ और नए राज्य अस्तित्व में आए. आज मध्यप्रदेश, केरल, कर्नाटक, हरियाणा और छत्तीसगढ़ का स्थापना दिवस है. आइए डालते हैं इन राज्यों के इतिहास पर छोटी सी नजर. Also Read - Coronavirus: कोरोना की जंग में जीता केरल का बुजुर्ग दंपत्ति, 93 और 88 साल की उम्र में दी मौत को मात

मध्यप्रदेश
1950 में पूर्व ब्रिटिश केंद्रीय प्रांत और बरार, मकाराई के राजसी राज्य और छत्तीसगढ़ मिलाकर मध्यप्रदेश का निर्माण हुआ तथा नागपुर को राजधानी बनाया गया. सेंट्रल इंडिया एजेंसी द्वारा मध्य भारत, विंध्य प्रदेश और भोपाल जैसे नए राज्यों का गठन किया गया. राज्यों के पुनर्गठन के परिणाम स्वरूप 1956 में, मध्य भारत, विंध्य प्रदेश और भोपाल राज्यों को मध्यप्रदेश में विलीन कर दिया गया, तत्कालीन सी.पी. और बरार के कुछ जिलों को महाराष्ट्र में स्थानांतरित कर दिया गया तथा राजस्थान, गुजरात और उत्तर प्रदेश में मामूली समायोजन किए गए. फिर भोपाल राज्य की नई राजधानी बन गया. शुरू में राज्य के 43 जिले थे. इसके बाद, वर्ष 1972 में दो बड़े जिलों का बंटवारा किया गया, सीहोर से भोपाल और दुर्ग से राजनांदगांव अलग किया गया. तब जिलों की कुल संख्या 45 हो गई। वर्ष 1998 में, बड़े जिलों से 16 अधिक जिले बनाए गए और जिलों की संख्या 61 बन गई. नवंबर 2000 में, राज्य का दक्षिण-पूर्वी हिस्सा विभाजित कर छत्तीसगढ़ का नया राज्य बना. इस प्रकार, वर्तमान मध्यप्रदेश राज्य अस्तित्व में आया, जो देश का दूसरा सबसे बड़ा राज्य है और जो 308 लाख हेक्टेयर भौगोलिक क्षेत्र पर फैला हुआ है. Also Read - COVID-19: छत्तीसगढ़ में 62 हजार से अधिक परिवारों को निशुल्क भोजन और राशन, निर्देश जारी

कर्नाटक
कर्नाटक का लगभग 2,000 वर्ष का लिखित इतिहास उपलब्‍ध है. कर्नाटक पर नंद, मौर्य और सातवाहन राजाओं का शासन रहा. इसके अलावा चौथी शताब्‍दी के मध्‍य से इस राज्‍य पर इसी क्षेत्र के राजवंशों बनवासी के कदंब तथा गंगों का अधिकार रहा. पेशवा (1818) और टीपू सुल्तान (1799) की पराजय के पश्‍चात कर्नाटक ब्रिटिश शासन के अधीन हो गया. स्‍वतंत्रता आंदोलन के बाद राज्‍यों के एकीकरण की शुरुआत हुई. स्वतंत्रता के बाद मैसूर राज्‍य बना और कन्‍नड़ भाषियों की अधिकता वाले विभिन्‍न क्षेत्रों का एकीकरण किया गया. वर्ष 1973 में इस विस्‍तारित मैसूर राज्‍य का नाम बदलकर कर्नाटक कर दिया गया. वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार कर्नाटक की जनसंख्या 6 करोड़ 11 लाख से अधिक है. इसकी राजधानी बेंगलुरू है. Also Read - कर्नाटक में लॉकडाउन के दौरान शराब न मिलने से परेशान दो शख्स ने किया सुसाइड

केरल
देश की दक्षिण-पश्चिमी सीमा पर अरब सागर और सह्याद्रि पर्वत श्रृंखलाओं के मध्य एक स्थित एक खूबसूरत भूभाग को आज हम केरल के नाम से जानते हैं. अपने बेहतरीन और खूबसूरत पर्यटक स्थलों के कारण पूरी दुनिया में केरल सबसे मनमोहक टूरिस्ट-प्लेस में से एक है. इसकी सुंदर समुद्र तटों और पूरे राज्य में फैली हरियाली को लेकर इसे GOD’S OWN COUNTRY (ईश्वर का अपना देश) भी कहा जाता है. मलयालम भाषा बहुल इस राज्य में देश की आजादी से पहले कई रियासतें थीं. स्वतंत्रता के बाद तिरुवितांकर और कोच्चिन (कोच्चि) को मिलाकर केरल राज्य बना. 1956 में राज्य पुनर्गठन आयोग की स्थापना के बाद केरल में मालाबार के हिस्से को भी जोड़ दिया गया और तब जाकर आज दिखने वाला इस राज्य का स्वरूप बना.

हरियाणा
दिल्ली, पंजाब, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की सीमाओं से सटे और फसल उत्पादन तथा खेल जगत में अपनी अद्भुत उपलब्धियों से नाम रोशन करने वाला राज्य हरियाणा भी 1 नवंबर को ही अस्तित्व में आया था. पंजाब के कुछ हिस्से काटकर बने इस राज्य की स्थापना वर्ष 1966 में की गई थी. स्थापना के कुछ ही वर्षों में इस राज्य के लोगों ने अपनी मेहनत और कुशलता से हरियाणा को देश के समृद्धशाली राज्यों में से एक बना दिया. यही वजह है कि पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश या उत्तराखंड के मुकाबले आज हरियाणा देश के अमीर राज्यों में से एक है.

छत्तीसगढ़
नई सदी में बने देश के कुछ राज्यों में से एक छत्तीसगढ़ भी आज अपना स्थापना दिवस मना रहा है. आदिवासी संस्कृति की आबोहवा समेटे इस राज्य की स्थापना की मांग यूं तो 1920 से ही होने लगी थी. लेकिन संगठित रूप से 1990 के बाद से राज्य गठन की मांग ने जोर पकड़ा. आखिरकार नई सदी के आने के साथ ही वर्ष 2000 में झारखंड और उत्तराखंड के साथ अस्तित्व में आया छत्तीसगढ़, प्राकृतिक संपदा की समृद्धि के मामले में देश के गिने-चुने राज्यों में से एक है. मध्यप्रदेश, झारखंड, ओडिशा और महाराष्ट्र की सीमा से सटे छत्तीसगढ़ का उल्लेख प्राचीन भारतीय शास्त्रों में भी रहा है. प्राचीन काल में छत्तीसगढ़ का उल्लेख दक्षिण कोशल प्रांत के रूप में किया जाता है.