नई दिल्ली. जम्मू-कश्मीर में पत्थरबाजी और घात लगाकर किए जा रहे हमलों को लेकर सेना के जवान और पुलिस अभी रणनीति बना ही रहे हैं कि उनके सामने एक नई चुनौती आ गई है. पिछले कुछ महीने से वहां स्नाइपर अटैकर्स ने चिंता बढ़ा दी है. बताया जा रहा है कि ये हमलावर आतंकवादी संगठन जैश-ऐ-मोहम्मद से जुड़े हैं और उन्हें पाकिस्तानी सेना मदद कर रही है.

बता दें कि इस स्नाइपर्स अटैकर्स ने इस साल सितंबर में कश्मीर घाटी में तीन जवानों की हत्या कर दी. अंग्रेजी वेबसाइट इकॉनमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इसके बाद से वहां काम कर रही सुरक्षा एजेंसियों ने नए सिरे से रणनीति बनाने पर विचार शुरू कर दिया है.

सितंबर में हुई थी पहली घटना
स्नाइपर से अटैक की पहली घटना 18 सितंबर को पुलवामा के नेवा में हुई. इस दौरान एक सीआरपीएफ का जवान गंभीर रूप से घायल हो गया था. इसके बाद से ट्राल में एक सशस्त्र सीमा सुरक्षा बल का जवान और एक आर्मी के जवान की मौत हो गई. इसके बाद एक सीआईएसएफ जवान की नौगाम में स्नाइपर्स अटैकर्स ने हत्या कर दी.

4 आतंकी सक्रिय
इंटेलिजेंस इनपुट के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियां ये मानती हैं कि जैश-ऐ-मोहम्मद समर्थित दो आतंकवादी गुट के दो-दो आतंकवादी इस साल सितंबर में कश्मीर घाटी में घुसे हैं. वे यहां के लोकल लोगों की मदद से पुलवामा और आस-पास के जिलों में घुसे हैं. इन चारों आतंकवादियों को पाकिस्तान की आईएसआई ने ट्रेनिंग दी है और वे स्नाइपर्स चलाने में पारंगत हैं.

यहां से आए हथियार
रिपोर्ट के मुताबिक, उनके पास M-4 कार्बाइन्स है. इसका ज्यादातर उपयोग अमेरिका समर्थित एजेंसियां अफगानिस्तान में करती हैं. ये हथियार तालिबान से मंगाए गए हैं. हालांकि, ये भी कहा जा रहा है कि ये हथियार पाकिस्तान की स्पेशल फोर्सेज भी प्रयोग करती है.