श्रीनगर: जम्मू कश्मीर में सीमा पार से संघर्ष विराम के ताजा उल्लंघन पर प्रदेश की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के सैन्य अभियान महानिदेशकों को आपस में एक बार फिर बातचीत कर यह रक्तपात बंद करना चाहिए. महबूबा ने यहां संवाददाताओं से कहा , ‘ सीमा पर संघर्ष विराम उल्लंघन दुर्भाग्यपूर्ण है और यह सैन्य अभियान महानिदेशकों के स्तर पर बातचीत के बाद हुआ है . ऐसा नहीं होना चाहिए था. संघर्ष विराम उल्लंघन के दौरान सीमा सुरक्षा बल के दो जवानों के शहीद होने की घटना के बाद मुख्यमंत्री का यह बयान आया है. Also Read - भारत ने Su-30MKI fighter से दागी ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, जहाज को निशाना बनाया

दोनों देशों को रक्तपात रोकना चाहिए
मुख्यमंत्री ने कहा कि दोनों तरफ के लोग इस गोलीबारी में मारे जा रहे हैं . दोनों देशों के सैन्य अभियान महानिदेशकों को बातचीत कर इस रक्तपात को रोकना चाहिए. उन्होंने कहा ,‘ दोनों तरफ के लोगों की जान जा रही है . सैन्य अभियान के महानिदेशकों को दोबारा मुलाकात कर इस पर बातचीत करनी चाहिए तथा सीमा पर गोलीबारी और रक्तपात बंद होना चाहिए. 29 मई को भारत और पाकिस्तान के सैन्य अभियान महानिदेशकों ने संघर्ष विराम के 2003 के समझौते को पूरी तरह लागू करने पर सहमति जताई थी. Also Read - फ्रांस की चिंगारी से इस्‍लामी देशों के बीच दो धड़ों की गुटबंदी तेज, बायकाट की जंग बढ़ी

राज्य में कत्लेआम रोकने का मौका
वहीं महबूबा ने अपनी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, एकतरफा संघर्षविराम और फिर बातचीत के लिए तैयार होकर केंद्र ने कश्मीर की आवाम और नेताओं को एक मौका दिया है. अब उन्हें यह फैसला करना ही होगा कि इस मौके का कैसे फायदा उठाएं. महबूबा ने कहा कि संघर्ष विराम एवं बातचीत की पेशकश ने अलगाववादियों को जम्मू कश्मीर में कत्लेआम को रोकने का एक मौका दिया है. Also Read - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की सेना का पाकिस्तान में खौफ: भाजपा

जम्मू कश्मीर को बचाने के लिए सभी आगे आएं
उन्होंने कहा , ‘ ऐसी अन्य पार्टियां भी हैं जो मुख्यधारा में नहीं हैं और अगर उनका कोई और एजेंडा है और वे जम्मू कश्मीर में कत्लेआम को रोकना चाहते हैं तो यह उनके लिए एक मौके की तरह है. हम हमेशा से यही कहते हैं कि जम्मू कश्मीर का राजनीतिक समाधान होना चाहिए और सेना, सीआरपीएफ या पुलिस इन्हें नहीं सुलझा सकती है. उन्होंने कहा , इसे सिर्फ बातचीत के जरिये राजनीतिक रूप से सुलझाया जा सकता है और जब केंद्र की ओर से बातचीत की पेशकश हुई है तो मैं सभी पक्षकारों से अनुरोध करती हूं कि वे जम्मू कश्मीर और उसकी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिये आगे आए.

केंद्र अलगाववादियों से बातचीत का इच्छुक
केंद्र ने रमजान के पाक महीने में एकतरफा संघर्षविराम की घोषणा की है, जबकि केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल में कहा कि अगर अलगाववादी बातचीत के इच्छुक हैं तो केंद्र घाटी में उनसे बातचीत के लिये तैयार है. मुख्यमंत्री ने कहा कि वह अलगाववादियों पर इसके लिये दबाव नहीं बना सकते , लेकिन उन्हें (अलगाववादियों को) भी कश्मीर के नौजवानों को पत्थर और बंदूक की संस्कृति से बाहर निकालने पर सोचना ही होगा.