नई दिल्ली: लगभग 13 हजार करोड़ के घोटाले के आरोपी कारोबारी मेहुल चोकसी ने भारत की नागरिकता छोड़ दी है. चोकसी ने सोमवार को एंटीगा हाई कमीशन में अपना भारतीय पासपोर्ट जमा कर दिया. चोकसी पर पंजाब नैशनल बैंक में 13 हजार करोड़ रुपये के घोटाले का आरोपी है. चोकसी ने हाई कमीशन को बताया कि उसने नियमों के तहत एंटीगा की नागरिकता ले ली है और भारत की नागरिकता छोड़ी है. चोकसी ने नागरिकता छोडने के लिए 177 यूएस डॉलर का ड्राफ्ट भी जमा कराया है. चोकसी के प्रत्यर्पण में जुटी भारत की सरकार के लिए यह झटका माना जा रहा है.

इंटरपोल ने मेहुल चोकसी के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया था. चोकसी ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की सीबीआई की अर्जी के खिलाफ अपील की थी. सीबीआई प्रवक्ता अभिषेक दयाल ने बताया था कि इंटरपोल ने सीबीआई के अनुरोध पर मेहुल चोकसी के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया है. चोकसी ने आरोप लगाया है कि उसके खिलाफ मामले राजनीतिक षडयंत्र का नतीजा हैं. उसने भारत में जेल की स्थितियों, अपनी निजी सुरक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर सवाल भी उठाए. सूत्रों ने बताया कि यह मामला इंटरपोल समिति की पांच सदस्यीय अदालत के पास गया. रेड कॉर्नर नोटिस भगोड़े अपराधियों के लिए एक तरह का अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट होता है जिसमें इंटरपोल अपने सदस्य देशों से उन्हें गिरफ्तार करने या हिरासत में लेने का अनुरोध करता है.

पीएनबी से जाली हलफनामों और विदेशी ऋण पत्रों को जारी कर धोखाधड़ी की गई. सीबीआई ने इस घोटाले में नीरव मोदी और चोकसी दोनों के खिलाफ अलग-अलग आरोप पत्र दाखिल किया है. सीबीआई ने पिछले महीने अपने आरोप पत्र में कहा कि चोकसी ने 7,080.86 करोड़ रुपये ठगे जो इस देश का सबसे बड़ा बैंकिंग घोटाला है. नीरव मोदी ने कथित तौर पर 6,000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की. चोकसी की कंपनियों पर 5,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त कर्ज भी सीबीआई की जांच के दायरे में है. अधिकारियों ने बताया कि ऐसा आरोप है कि नीरव मोदी और चोकसी ने अपनी कंपनियों के जरिए जाली हलफनामों और विदेशी ऋण पत्रों के जरिए दी गारंटी का इस्तेमाल कर भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओं से ऋण लिया जो चुकाया नहीं गया.