Full Lockdown In India 2021: देश में कोरोना का कहर दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है. प्रतिदिन कोरोना संक्रमण के भयावह आंकड़े मिल रहे हैं. सोमवार को भारत में 3,52,991 नए मामले ने एक तरफ जहां देश की सरकार की तो वहीं विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है. ऐसे में कुछ विशेषज्ञों का मानना ​​है कि पूरे देश में एक बार फिर से पूरी तरह से फुल लॉकडाउन लगा देना चाहिए तभी हम इस वायरस की श्रृंखला को तोड़ने में कामयाब होंगे और अब यही  एकमात्र तरीका है. जबकि कुछ अन्य जानकारों का मानना है कि देशव्यापी लॉकडाउन से परेशानी बढ़ जाएगी, हालांकि जहां इसका प्रसारण ज्यादा है वहां फुल लॉकडाउन जरूरी है.Also Read - भारत में आएगी कोरोना की चौथी लहर? इस आईआईटी प्रोफेसर ने किया है ये दावा-जानिए क्या कहा

बता दें  ​​कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पिछले सप्ताह राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा था कि देशव्यापी या राज्यव्यापी तालाबंदी अंतिम विकल्प होना चाहिए, क्योंकि COVID दिशानिर्देशों का पालन करना केवल लॉकडाउन लागू करने से अधिक महत्वपूर्ण है. तो अब सवाल यह उठता है कि क्या कोविड श्रृंखला को तोड़ने का एकमात्र रास्ता है? क्या फुल लॉकडाउन कुछ ही क्षेत्रों में होना चाहिए? क्या लॉकडाउन लोगों की आजीविका को प्रभावित करेगा? Also Read - Covid 19 in India: देश में बढ़ रहा कोरोना का ग्राफ, दिल्ली में बढ़ रही कंटेनमेंट जोन्स की संख्या

जानिए विशेषज्ञों ने फुल लॉकडाउन के बारे में क्या राय दी है…. Also Read - कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक 9 मई को AICC मुख्यालय में होगी | पढ़ें दिन भर की सभी बड़ी खबरें...

इंडिया टुडे से बात करते हुए, पीएचएफआई, बेंगलुरु में लाइफकेयर एपिडेमियोलॉजी, के प्राध्यापक और प्रमुख, डॉक्टर गिरिधर बाबू ने कहा कि फुल लॉकडाउन कोरोना से बचने का एकमात्र रास्ता नहीं है. उन्होंने कहा कि, कोरोना के इतनी तेजी से फैलने की स्पीड और इसके ट्रांसमिशन को देखने की जरूरत है. इसके फैलाव और इसके ट्रांसमिशन का स्वरूप क्या हैं, ये देखने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि  हम इसके रोकथाम में विफल रहे हैं, ये मानना होगा. फिलहाल जहां ज्यादा मामले आ रहे हैं वहां लॉकडाउन की जरूरत है ताकि इसकी चेन को तोड़ा जा सके. हमें संख्या को कम करने और स्वास्थ्य सेवा प्रणाली पर ध्यान देना चाहिए.

डॉक्टर ने ये भी कहा कि अगर आप कोरोना के ट्रांसमिशन का अच्छी तरह से पता नहीं लगाते हैं, तो फुल लॉकडाउन से कुछ नहीं होगा. उन्होंने यह भी कहा कि लॉकडाउन केवल चेन तोड़ने में थोड़ी मदद कर सकता है, लेकिन रोकथाम के लिए आवश्यक कदम उठाने होंगे.

फुल लॉकडाउन पर डॉक्टर विशाल राव, सदस्य, विशेषज्ञ समिति, COVID टास्क फोर्स, गवर्नमेंट ऑफ़ कर्नाटक, बेंगलुरु ने कहा कि लॉकडाउन से अभी चल रही टीकाकरण की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है. इस कारण हमें कोरोना के खिलाफ लड़ाई के लिए अपनी रणनीति बदलनी होगी.

डीबीटी / वेलकम ट्रस्ट इंडिया एलायंस, नई दिल्ली के वायरोलॉजिस्ट और सीईओ डॉक्टर शाहिद जमील ने कहा कि फुल लॉकडाउन नहीं लगाया जाना चाहिए. “हमें कोरोना के सबसे ज्यादा संक्रमण  के क्षेत्रों में ही फुल लॉकडाउन की आवश्यकता है. हमने देखा कि आजीविका के लिए पिछले राष्ट्रीय लॉकडाउन के कारण क्या आपदा आई थी, इसीलिए इस समय में संतुलन बनाए रखना आवश्यक है, ”उन्होंने कहा.

बता दें कि सोमवार को, भारत ने कुल 3,52,991 नए मामले दर्ज किए, जो COVID-19 मामलों की कुल संख्या को 1,73,13,163 तक ले गए जबकि सक्रिय मामलों ने 28 लाख का आंकड़ा पार कर लिया है. स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, मृत्यु रिकॉर्ड 2,812 नई मृत्यु के साथ बढ़कर 1,95,123 हो गई.